राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष के मुख्य वकील राजीव धवन को जमीयत उलमा ए हिंद द्वारा इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका की पैरवी से हटाए जाने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने धवन का पक्ष लिया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि बोर्ड के पक्षकारों की पुनर्विचार याचिका में धवन ही उनके वकील होंगे.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने एक बयान में कहा कि अयोध्या मामले में धवन ने उच्चतम न्यायालय में जिस समर्पण और ईमानदारी के साथ मुस्लिम पक्ष की बात रखी उसके लिए मुसलमान कौम हमेशा उनकी एहसानमंद रहेगी. उन्होंने कहा कि धवन हमारे साथ वर्ष 1993 से काम कर रहे हैं और उन्होंने देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के संरक्षण में अद्वितीय योगदान किया है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और पूरी मुसलमान कौम उन्हें बहुत इज्जत की नजर से देखती है. रहमानी ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी तथा अन्य सहयोगी वकील मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के पक्षकारों की तरफ से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं और धवन ही इस मामले पर अदालत में पक्ष रखने की अगुवाई करेंगे. जिलानी ने बताया कि बोर्ड के पक्षकारों की तरफ से पुनर्विचार याचिका एक-दो दिन में दाखिल कर दी जाएगी.

इस प्रकरण में शीर्ष अदालत के नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार के लिये मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता वाले जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता एजाज मकबूल ने कहा था कि धवन को अस्वस्थता की वजह से इस मामले से हटा दिया गया है. इस पर अधिवक्ता राजीव धवन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें अस्वस्थ होने जैसे ‘मूर्खतापूर्ण’ आधार पर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद प्रकरण से हटा दिया गया है. राजीव धवन ने उच्चतम न्यायालय में इस प्रकरण में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पैरवी की अगुवाई की थी.

राजीव धवन ने इस संबंध में फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी है. इसमें उन्होंने कहा है कि अब इस मामले में पुनर्विचार या किसी अन्य तरह से उनका संबंध नहीं है. धवन ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘मैंने एकजुटता के साथ सभी मुस्लिम पक्षकारों की ओर से इस मामले में बहस की थी और ऐसा ही चाहूंगा. मुस्लिम पक्षकारों को पहले अपने मतभेद सुलझाने चाहिए.’