दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्डरिंग मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत दे दी है. यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दर्ज किया था. पीटीआई के मुताबिक पी चिदंबरम को दो लाख रुपये का निजी मुचलका भरने और इतनी ही राशि के दो जमानती लाने को कहा गया है.

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय ने पी चिदंबरम को जमानत दिए जाने का विरोध किया था. उसकी ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा था कि हिरासत में होने के बावजूद पी चिदंबरम महत्वपूर्ण गवाहों पर अपना ‘प्रभाव’ रखते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान निदेशालय ने 12 बैंक खातों की पहचान की है जिनमें इस अपराध से मिली रकम जमा की गयी. एजेंसी के मुताबिक उसके पास ऐसी 12 संपत्तियों का भी ब्योरा है जिन्हें कई दूसरे देशों में खरीदा गया है. ईडी के मुताबिक पी चिदंबरम ने ‘निजी लाभ’ के लिये वित्त मंत्री के ‘प्रभावशाली कार्यालय’ का इस्तेमाल किया और इस अपराध के एवज में मिली रकम को हड़प गये. उसका यह भी कहना था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री होने की वजह से पी चिदंबरम की उपस्थिति ही गवाहों को भयभीत करने के लिये काफी है.

उधर, 74 वर्षीय पी चिदंबरम ने इस दलील को खारिज किया था. उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में दलील दी थी कि उन्हें ‘अनुचित तरीके’ से पिछले तीन महीने से भी ज्यादा समय से सिर्फ इसलिए जेल में रखा गया है कि वे आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्डरिंग में मुख्य आरोपित कार्ति चिदंबरम के पिता हैं और इस मामले से उन्हें जोड़ने के लिये एजेंसियों के पास ‘एक भी साक्ष्य’ नहीं है.

चिदंबरम को पहली बार आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था. इस मामले में उन्हें शीर्ष अदालत ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी. इसी दौरान 16 अक्टूबर को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले से मिली रकम से संबंधित मनी लॉन्डरिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद वे जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे जिसने 15 नवंबर को उनकी अपील ठुकरा दी.