फरवरी 2016 में दिल्ली के युवा बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अंडर-19 विश्व कप में 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर धूम मचा दी थी. यह नया विश्व रिकॉर्ड था. हालांकि, उस समय कई लोगों ने यह कहकर उनके प्रदर्शन को तव्वजो नहीं दी कि यह कारनामा उन्होंने नेपाल जैसी टीम के खिलाफ किया है. लेकिन, इसके कुछ महीने बाद ही ऋषभ पंत का नाम एक बार फिर सुर्ख़ियों में आया. तब इस 18 वर्षीय बल्लेबाज ने अपने पहले रणजी सीजन में तिहरा शतक जमा दिया था. इस पूरे सीजन में उन्‍होंने कमाल का प्रदर्शन किया और आठ मैचों में 81 के औसत से 972 रन बनाए. झारखंड के खिलाफ एक मुकाबले में उन्‍होंने केवल 48 गेंदों में शतक भी ठोक दिया जो रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे तेज शतक है. इस मैच में ऋषभ पंत ने 21 छक्‍के लगाए. यह भी एक रिकॉर्ड था.

इसके बाद 2017 के आईपीएल में भी ऋषभ पंत छाए रहे. जनवरी 2018 में उन्होंने एक और कीर्तिमान स्थापित किया. सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट में इस उत्तराखंडी युवा ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ 32 गेंदों में शतक जड़ दिया. घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्डों की इबारत खड़ी करने के बाद किसी को भी यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही थी कि भारत को महेंद्र सिंह धोनी का वारिस मिल गया है. इस दौरान भारतीय टीम में उनका चयन हुआ और यहां भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा.

लेकिन अब बीते करीब आठ महीनों से ऋषभ पंत एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं और इस बार इसकी वजह उनका ख़राब प्रदर्शन है. आलम यह है कि भारत मैच जीते या हारे, लेकिन उनके प्रदर्शन की चर्चा क्रिकेट के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खूब होती है. उनके लगातार खराब प्रदर्शन की वजह से यह तक कहा जाने लगा है कि वे उन खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिनका अगले साल होने वाले टी20 विश्व कप के लिए स्थान पक्का नहीं है.

ऋषभ पंत के बीते कुछ समय के टी20 प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह भी कुछ ऐसा ही हाल बयां करता है. साल 2018 में उन्होंने आठ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जिनकी सात पारियों में 16 के खराब औसत के साथ उन्होंने सिर्फ 114 रन बनाए. इस दौरान पूरे साल में वे टी20 में सिर्फ एक अर्धशतकीय पारी ही खेल पाए. साल 2019 में अभी तक ऋषण पंत 13 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेल चुके हैं. इनमें उनके बल्ले से मात्र एक अर्धशतक ही निकला है. उन्होंने 20 की औसत के साथ कुल 201 रन बनाये हैं. इस तरह देखा जाए तो इस पूरे साल भी टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वे कुछ ख़ास नहीं कर पाए हैं. बीते महीने बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में उन्हें दो पारियां खेलने का मौका मिला. इसमें उन्होंने एक पारी में 27 तो दूसरी पारी में छह रन बनाए.

इतना ही नहीं नवंबर अंत में ऋषभ पंत दिल्ली की ओर से सैय्यद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में भी खेले. लेकिन घरेलू गेंदबाजों के आगे भी उनका बल्ला खामोश ही रहा. हरियाणा के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने 32 गेंदों में 28 रन और दूसरे मैच में राजस्थान के खिलाफ 27 गेंदों में 30 रन की धीमी पारियां खेलीं. इन दोनों मैचों में वे बिलकुल भी लय में नजर नहीं आए. दिल्ली को इन दोनों मैचों में हार का सामना भी करना पड़ा.

ऋषभ पंत के साथ एक दिक्क्त यह भी है कि वे सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं बल्कि, अपनी विकेटकीपिंग और डीआरएस की गलतियों के लिए चर्चा में आ गए हैं. बांग्लादेश के खिलाफ एक मैच में तो खराब स्टंपिंग के चलते उन्हें काफी ट्रोल किया गया, उनकी इस गलती के कारण टीम को विकेट की जगह नो-बॉल मिली थी. खराब विकेटकीपिंग की वजह से बायें हाथ के इस खिलाड़ी को बीते महीने खेल के लंबे प्रारूप से बाहर कर दिया गया और ऋद्धिमान साहा को बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका दिया गया.

कुछ जानकार यह कहते हैं कि ऋषभ पंत की लगातार खराब फॉर्म के कारण टेस्ट क्रिकेट के बाद अब टी20 टीम और वनडे टीम से भी उनके बाहर होने का समय नजदीक आता जा रहा है. इन लोगों के मुताबिक ऐसा इसलिए भी है कि संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे कई युवा विकेट कीपर बल्लेबाज भारतीय टीम के लिए अपना दावा लगातार मजबूती से ठोक रहे हैं. संजू सैमसन को घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के चलते वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 टीम में चुना भी गया है. बीते अक्टूबर में केरल के इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने विजय हजारे ट्रॉफी में तेज दोहरा शतक ठोका तो चयनकर्ताओं को उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका देना पड़ा. गोवा के खिलाफ इस मैच में सैमसन ने 125 गेंद में 200 रन बनाये थे.

हालांकि, संजू सैमसन बीते दो सालों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इस प्रदर्शन के चलते ही उन्हें बीते साल इंडिया-ए टीम में इंग्लैंड दौरे के लिए शामिल किया गया था. लेकिन तब यो-यो टेस्ट में फेल होने के कारण वे इंग्लैंड नहीं जा पाए थे. उस समय इस मौके का फायदा ऋषभ पंत ने उठाया था और इस दौरे से ही उन्होंने भारतीय टीम तक का रास्ता तय किया. ऐसे में आज से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो रही सीरीज में संजू सैमसन कोई कोताही नहीं बरतना चाहेंगे और मौका मिलते ही उसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे.

हालांकि, ऋषभ पंत पर कोई दबाव न पड़े इस बजह से टीम मैनजेमेंट और चयनकर्ता ने साफ़ किया है कि संजू सैमसन को बतौर बल्लेबाज भारतीय टीम में जोड़ा गया है और विकेटकीपिंग के लिए ऋषभ पंत ही पहली पसंद हैं. लेकिन जाहिर है कि अगर ऋषभ पंत बल्लेबाजी के साथ-साथ विकेट कीपर की भी भूमिका में फिर विफल होते हैं तो सैमसन को उनकी जगह मौका दिया जाएगा. भारतीय टीम में अपने चयन के बाद संजू सैमसन भी साफ़ कर चुके हैं कि वे टीम प्रबंधन के चाहने पर विकेटकीपिंग करने के लिए सौ फीसदी तैयार हैं.