राज्यसभा में आज पहली बार संथाली भाषा बोली गई. पीटीआई के मुताबिक बीजेडी सदस्य सरोजिनी हेम्ब्रम ने शून्यकाल के दौरान लोक महत्व से जुड़ा अपना मुद्दा संथाली भाषा में उठाया. उन्होंने इस भाषा की लिपि ‘ओल चिकी’ तैयार करने वाले पंडित रघुनाथ मुर्मू को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी की. बीजेड़ी सदस्य ने कहा कि 1925 में संथाली की लिपि तैयार करने वाले पंडित मुर्मू का आदिवासी जनजीवन में बहुत ही ऊंचा और खास स्थान है और राज्य में उन्हें महान सांस्कृतिक आदर्श का दर्जा दिया जाता है.

संथाली ‘ऑस्ट्रो-एशियाटिक’ परिवार की एक शाखा से जुड़ी भाषा है. इसे भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में करीब 60 लाख बोलते हैं. भारत में संथाली भाषा का प्रयोग झारखंड, असम, बिहार, उड़ीसा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में होता है.

संथाली भाषा के पहली बार उच्च सदन में आने की सभापति एम वेंकैया नायडू और उप सभापति हरिवंश ने सराहना की. सरोजिनी हेम्ब्रम की बात पूरी होने के बाद सभापति ने कहा कि पहली बार सदन में संथाली बोली गई है और वह भी एक महिला सदस्य द्वारा. वेंकैया नायडू अक्सर शून्यकाल के दौरान सदस्यों को लोक महत्व से जुड़े उनके मुद्दे सदन में अपनी भाषा में उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि अन्य सदस्यों के लिए स्थानीय भाषा का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद उपलब्ध हो. आज भी संथाली का दोनों ही भाषाओं में अनुवाद उपलब्ध था. उप सभापति हरिवंश ने भी कहा कि उच्च सदन में पहली बार संथाली का स्वागत करते हुए कहा कि पंडित मुर्मू की न केवल आदिवासी समुदाय में खास जगह है बल्कि वे बहुत ही बेहतरीन साहित्यकार भी थे और उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं.