बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने मुख्य कोच रवि शास्त्री के साथ मतभेदों की अटकलों को कोरी अफवाह बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में लोगों को परखने का मानदंड बस प्रदर्शन होगा.

सौरव गांगुली ने शुक्रवार को ‘इंडिया टुडे’ के कार्यक्रम में कहा ,‘ये सब अटकलें हैं. मेरे पास इन सवालों का जवाब नहीं है.’ उनसे पूछा गया कि अतीत के मतभेदों के कारण रवि शास्त्री को लेकर क्या उनके कुछ पूर्वाग्रह हैं. इस पर सौरव गांगुली ने कहा, ‘अच्छा प्रदर्शन करिये और पद पर बने रहिये. प्रदर्शन खराब होगा तो कोई और आयेगा. जब मैं खेलता था, तब भी यही नियम था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अटकलें, खुलासे और कयास लगते रहेंगे लेकिन फोकस 22 गज के बीच प्रदर्शन पर रहना चाहिये.’ गांगुली ने विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा, ‘प्रदर्शन अहम है और उसका कोई विकल्प नहीं है.’

रवि शास्त्री और सौरव गांगुली के बीच मतभेद 2016 में सार्वजनिक हुए थे. उस समय शास्त्री ने कोच के पद के लिये आवेदन किया था और गांगुली उस समय क्रिकेट सलाहकार समिति में थे जिसने अनिल कुंबले को चुना था. अगले साल जब रवि शास्त्री कोच बने जब कुंबले ने कप्तान विराट कोहली के साथ मतभेद के कारण इस्तीफा दे दिया था.

टी20 विश्व कप 2020 के बारे में सौरव गांगुली ने कहा, ‘यह प्रारूप बेखौफ क्रिकेट खेलने के बारे में है. इसमें टीम में अपनी जगह पक्की करने की सोच लेकर मैदान पर ना उतरें.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हितों के टकराव के कारण पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में नहीं आ पा रहे. सचिन जैसे खिलाड़ी को भी जाना पड़ा. यह प्रशासकों पर लागू होना चाहिये, क्रिकेटरों पर नहीं.’

गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह के बारे में गांगुली ने कहा कि उनका निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा, ‘जय शाह ने एक चुनाव जीता है. उसके पिता राजनेता है, लेकिन उसका आकलन निजी तौर पर होना चाहिये.’ सौरव गांगुली ने कहा कि बीसीसीआई के मामलों में कोई राजनीतिक दखल नहीं है लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि प्रभावी लोग खेल के संचालन में शामिल रहेंगे.