भारतीय रेलवे ने एक बिरले कदम के तहत 50 साल से अधिक उम्र के अपने 32 अधिकारियों को समय से पहले रिटायर कर दिया है. यह कदम इन अधिकारियों की अक्षमता, संदिग्ध निष्ठा और अवांछित आचरण के चलते उठाया गया है. रेलवे की ओर से शुक्रवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी गई है.

पीटीआई के मुताबिक रेलवे ने कहा कि यह कदम समीक्षा के बाद उठाया गया है जिसका मकसद सभी स्तरों पर कार्यकुशलता में सुधार लाना और प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत बनाना है. बयान में कहा गया है, ‘समीक्षा समिति की सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया है. 1780 अधिकारियों की समीक्षा की गयी थी जिनमें से 32 को सेवानिवृत करने की अनुशंसा की गयी.’ अधिकारियों ने बताया कि 32 में से 22 निदेशक और उससे ऊपर के अधिकारी थे.

रेलवे के बयान में आगे कहा गया है, ‘रेलवे बोर्ड में इससे पहले समूह-ए के अधिकारियों की समीक्षा 2016-17 में की गयी थी और तब 1824 अधिकारियों की सेवाओं की समीक्षा की गयी थी. उस समय चार अधिकारी समय से पहले सेवानिवृत कर दिये गये थे. इसके बाद यह भी पाया गया था कि कई अधिकारियों की समीक्षा नहीं हुई है, जिनकी समीक्षा होनी जरूरी है.’

रेलवे के अधिकारियों ने यह भी कहा कि एक निश्चित उम्र हासिल करने वालों की समय-समय पर समीक्षा सरकारी कर्मचारी सेवा नियमावली के तहत की जाती है, लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है कि उन्हें समय से पहले सेवानिवृत कर दिया जाए. इनके मुताबिक इस समय ऐसी ही एक प्रक्रिया जोनल रेलवे में कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड और अराजपत्रित कर्मियों के लिए भी चल रही है.

भारतीय रेलवे के इस कदम से पहले बीते गुरूवार को राज्यसभा में कार्मिक मामलों के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि पिछले पांच सालों में 96 वरिष्ठ अधिकारियों समेत 220 भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत किया गया है.