लेखक-निर्देशक: मुदस्सर अज़ीज़
कलाकार: कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर, अनन्या पांडेय, अपारशक्ति खुराना
रेटिंग: 2.5/5

बहनो, आपको सब कुछ सहते रहना है क्योंकि मर्द ऐसे ही रहेंगे यानी मेन विल बी मेन. कुछ ऐसा ही संदेश ‘पति पत्नी और वो’ देती है जो कि साल 1978 में रिलीज हुई बीआर चोपड़ा की कॉमेडी फिल्म का रीमेक है. इसका लेखन और निर्देशन मुदस्सर अज़ीज़ ने किया है और कहानी को नए जमाने के लैंगिक समीकरणों और नैतिकता के हिसाब बदला भी है.

बेवफाई की यह नई कहानी कानपुर में स्थापित की गई है. यहां पति, चिंटू त्यागी पीडब्ल्यूडी के ऑफिस में काम करता है और नौकरी और पत्नी दोनों से बोर हो चुका है इसलिए जैसे ही दिल्ली से आई एक लड़की उससे मिलती है वह बिना वक्त गंवाए लड़की पर फिदा हो जाता है. मूल फिल्म से प्रेरणा लेते हुए यहां पर भी नायक पत्नी का अफेयर होने की झूठी बात कहकर पहले सहानुभूति और फिर प्यार पाने की कोशिश करता है. फिल्म देखते हुए यह समझना मुश्किल है कि आखिर पांच दशक पुराने इस फॉर्मूले में ऐसा क्याे है जो यह आज भी काम कर जाता है.

फिल्म में एक ऐसा मौका भी आता है जब दोनों महिलाएं लगाम अपने हाथ में ले लेती हैं. इसके बाद फिल्म मिसॉजनी को ज़ोर की लात मारकर कुछ क्रांतिकारी दिखाने की तरफ बढ़ती है. लेकिन जरा ही देर में दोनों जिस तरह का व्यवहार दिखाने लगती हैं, एक नया सवाल पैदा हो जाता है. सवाल यह है कि पत्नी यानी वेदिका जो बोल्ड ब्यूटी होने के साथ-साथ लेक्चरर भी है और वो यानी तपस्या, जो एक सेक्सी आंत्रप्रेन्योर है, इन दोनों को चिंटू त्यागी जैसे अतिसाधारण आदमी में ऐसा क्या दिखता है कि वे उस पर इस कदर फिदा रहती हैं?

इन सवालों को छोड़ें और अभिनय की बात करें तो फिल्म की शुरूआत में कार्तिक आर्यन और भूमि पेडनेकर के बीच नज़र आने वाली हैप्पी कपल वाली केमिस्ट्री आपको बहुत सुहाती है. थोड़ा आगे बढ़ने पर ये अलग-अलग भी बढ़िया काम करते हैं लेकिन आर्यन जहां अपने पुराने किरदारों की छवि को लिए हुए ही आगे बढ़ते हैं. वहीं भूमि पेडनेकर इतना कमाल अभिनय करती हैं जैसे असलियत में वेदिका त्रिपाठी ही हों.

फिल्म का सरप्राइज एलीमेंट अनन्या पांडेय हैं जो अपनी उम्र और लुक्स के चलते, इस तरह के रोल में पूरी तरह से फिट नहीं थीं. लेकिन इसके बाद भी अपने बढ़िया काम से इस किरदार को वैसा ही बना देती हैं, जैसा इसे होना चाहिए था. इनके अलावा, एक बार फिर हीरो के दोस्त की भूमिका में नज़र आ रहे अपारशक्ति खुराना अपने कमाल के अभिनय से आपको खूब खुश करते हैं. खुराना यहां अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग से यह बताते हैं कि उन्हें बॉलीवुड में छा जाने के लिए कुछ अच्छी भूमिकाओं की तलाश है बस!

मुदस्सर अज़ीज़ की इस फिल्म के बारे में कहा जा सकता है कि यह प्रगतिवादी होने का भ्रम पैदा करने में तो सफल हो जाती है. लेकिन कुछ क्लीशे चीजों को फिल्म से दूर न रख पाने के चलते पकड़ी भी जाती है. उदाहरण के लिए फिल्म में लगातार पत्नी को भारतीय कपड़ों और कथित दूसरी औरत को वेस्टर्न ड्रेसेज में दिखाया गया है, जिसे आज के जमाने में गले उतार पाना थोड़ा कठिन लगता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद मिसॉजनी भरे संवाद भी कई बार अखरने लगते हैं. कुल मिलाकर, इस कॉमेडी फिल्म को देखकर हंसी तो आती है लेकिन इसे गिल्टी प्लेज़र से अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता है!