हैदराबाद में एक वेटनरी डॉक्टर से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या मामले के चार आरोपितों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की घटना पर बहस जारी है. जहां कई मौजूदा और पूर्व पुलिस अधिकारियों ने इसे सही ठहराया है तो वहीं कुछ ने इसकी निंदा भी की है.

कर्नाटक में बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने मुठभेड़ का बचाव करते हुए इसे ‘सही और वक्त पर की गई कार्रवाई’ करार दिया. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘कार्रवाई सही तरीके से और समय पर की गई. कोई दूसरी राय नहीं हो सकती है. अगर वे (आरोपित) हिरासत से भाग जाते तो वे (पुलिस) जर्बदस्त दबाव में आ जाती. यह घटना जांच के दौरान हुई है और इसका बचाव करने की जरूरत है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जांच के दौरान अपराध के घटनाक्रम की पुनर्रचना के दौरान आरोपितों ने पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश की जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई.’ भास्कर राव का यह भी कहना था कि तेलंगाना की राजधानी में पिछले महीने घटित हुई दिल दहला देने वाली घटना कहीं भी हो सकती है और पुलिस पर मामले को हल करने का दबाव होता है.

आईपीजी और बेंगलुरु नगर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) हेमंत निंबलकर ने भी इस मुठभेड़ को सही ठहराया है. उन्होंने कहा, ‘सोशल मीडिया थोड़ा सब्र करो! बलात्कार का अपराध और मुठभेड़ दो अलग-अलग तथ्य हैं. जैसा कहा गया है कि यह आत्मरक्षा में उठाया गया कदम है न कि बलात्कार के आरोपितों को सजा है. तेलंगाना पुलिस का विश्वास लोकतंत्र और कानून की व्यवस्था में है. उन्हें इंतजार करना चाहिए.’

उत्तर प्रदेश के बागपत से भाजपा के सांसद और मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त सत्यपाल सिंह ने भी मुठभेड़ को सही बताया. उन्होंने ट्विटर पर कहा, ‘दिलेरी के साथ स्थिति से निपटने के लिए मैं हैदराबाद पुलिस को बधाई देता हूं. अगर आरोपित हिरासत से भाग जाते तो यह खाकी पर बड़ा धब्बा होता. जय हिंद.’

महाराष्ट्र और पंजाब के पूर्व डीजीपी एसएस विर्क का मानना है कि हैदराबाद पुलिस की ओर से बताई गई परिस्थितियों पर गौर करें तो कार्रवाई न्यायोचित है. उन्होंने कहा, ‘टीवी क्लिप्स दिखाती हैं कि लोग पुलिस कार्रवाई से खुश हैं. मैं उनसे असहमति नहीं रखता हूं लेकिन मुठभेड़ की तारीफ करते हुए हमें यह भी देखना है कि क्या कोई कानूनी खामी है.’ उनका यह भी कहना था, ‘बलात्कार और हत्या बर्बर घटना थी. अगर ऐसी चीजें होना शुरू हो गईं तो कोई भी लड़की या महिला सुरक्षित महसूस नहीं करेगी. यह पूरे समाज के खिलाफ अपराध था.’

उधर, तिहाड़ जेल की पूर्व महानिदेशक विमला मेहरा ने मुठभेड़ के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की मांग की है. मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त और पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जुलियो रिबेरियो ने भी मुठभेड़ की निंदा की. उन्होंने कहा, ‘न्यायिक प्रक्रिया प्रणाली काम नहीं कर रही है. इसलिए जनता और राजनीतिज्ञों के दबाव में ऐसे शॉर्ट कट अपनाएं जाते हैं.’

महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी शिवानंदन ने हैदराबाद के आरोपितों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की निंदा की. शिवानंदन ने कहा कि इस तरह के ‘शॉर्ट कट’ लंबे अरसे में अपराध को रोकने में मदद नहीं करेंगे. 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘ मुठभेड़ के बाद थोड़े समय के लिए पुलिस की तारीफ की जा सकती है लेकिन यह लंबे समय के लिए अच्छी नहीं है.’ मुंबई में उनके कार्यकाल के दौरान 1990 के दशक में पुलिस ने कई गैंगस्टरों को मुठभेड़ में मार गिराया था. गैंगस्टरों के साथ कई मुठभेड़ें हुई थी. 26/11 आतंकी हमले के बाद मुंबई पुलिस की अगुवाई करने वाले शिवानंदन ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी की मदद से महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के उपाय करना बेहतर है.