1-बीते हफ्ते पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल का जन्मदिन था. यह उनका जन्म शताब्दी वर्ष भी है. आईके गुजराल सिर्फ 11 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहे थे. उनकी शख्सियत के दिलचस्प पहलुओं के बारे में बताता द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता का लेख.

सचमुच संयोग से प्रधानमंत्री बने गुजराल अपनी शालीनता की वजह से सबसे अलग खड़े दिखते थे

2-कैबिनेट की मुहर के बाद अब नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने की तैयारी है. इस विधेयक का असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में तीखा विरोध हो रहा है. लेकिन एनडीटीवी खबर पर अपने इस लेख में रवीश कुमार का मानना है कि इस विधेयक का लेना-देना पूर्वोत्तर से कम और हिंदी पट्टी से ज्यादा है.

हिन्दी प्रदेश को कचरे के ढेर में बदलने के लिए एक और तैयारी पूरी : नागरिकता संशोधन विधेयक

3- हैदराबाद और उन्नाव मामलों के बाद देश भर में फिर बलात्कार पर बहस छिड़ी है. एक वर्ग का मानना है कि मौत की सजा महिलाओं को ऐसे अपराधों के खिलाफ सुरक्षा दे सकती है. लेकिन द वायर हिंदी पर अपने इस लेख में जाह्नवी सेन का मानना है कि ऐसा नहीं है.

वे सात कारण, जो बताते हैं कि बलात्कार के मामले में मौत की सज़ा क्यों कारगर नहीं है

4-इथिकल हैकर यानी वे विशेषज्ञ जो किसी साइबर अपराधी से पहले किसी वेब कोड की कमी का पता लगाते हैं. इन दिनों ये लोग काफी पैसा कमा रहे हैं और यह इंडस्ट्री भी तेजी से बढ़ रही है. इन्हें बग हंटर भी कहा जाता है. इन लोगों को बड़ी कंपनियां कोई भी खामी बताने पर बड़ी इनामी राशि देती हैं. बीबीसी पर यह लेख इन्हीं बग हंटर्स के बारे में बताता है.

क़ानूनी तरीक़े से लाखों डॉलर कैसे कमा रहे हैं भारतीय हैकर्स

5-जलवायु परिवर्तन जीवों को मौसमी बदलावों के मुताबिक ढलने या नया बसेरा खोजने पर मजबूर कर रहा है. डॉयचे वेले हिंदी पर यह लेख बताता है कि जीव जंतुओं की करीब 2,000 प्रजातियां अपना घर छोड़ कहीं और जाने पर मजबूर हैं और जल्द ही इंसान भी इस बदलाव की कीमत चुकाएगा.

इको सिस्टम चरमराने का संकेत है जीवों का विस्थापन