फ्रांस में प्रस्तावित पेंशन सुधारों को लेकर देश में विरोध तेज हो गया है. शनिवार को भी यूनियनों ने सरकार के पेंशन सुधार कार्यक्रम का जोरदार विरोध किया. हड़ताल के कारण मेट्रो सेवाओं समेत पूरे देश का सार्वजनिक परिवहन ठप रहा. यूनियनों ने चेतावनी दी है कि उनका विरोध अगले हफ्ते भी जारी रहेगा.

फ्रांस में सरकार के ताजा पेंशन सुधारों के खिलाफ हड़ताल की शुरुआत गुरुवार को हुई. हड़ताल का प्रभाव इतना अधिक था कि इसने 1995 की सर्दी की यादें ताजा कर दीं जब तीन हफ्ते के भारी विरोध की वजह से तत्कालीन सरकार को अपनी सामाजिक नीति वापस लेनी पड़ी थी. हड़ताल के कारण पूरे देश में रेल, मेट्रो ट्रेन सेवाएं ठप पड़ गई थीं. हवाई सेवाओं पर इसका कम असर पड़ा था. बृहस्पतिवार के प्रदर्शन में करीब आठ लाख लोगों ने हिस्सा लिया था. हड़ताल के चलते एफिल टॉवर समेत देश के कई पर्यटन स्थल बंद कर दिए गए हैं.

हड़ताल राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों की पेंशन सुधार की उनकी योजना के लिए चुनौती बन गई है. सैकड़ों की तादाद में लोग सड़कों पर उतरे ओर अहम परिवहन सेवाएं ठप रहीं. मैक्रों देश में यूनिवर्सल पेंशन स्कीम लागू करना चाहते हैं, जिससे निजी और सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद बराबर पेंशन मिले. लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि इस प्रावधान में खामी है जिसके चलते 62 साल में रिटायर होने के बाद भी उन्हें काम करना पड़ेगा.

फिलहाल फ्रांस में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए 42 अलग-अलग पेंशन स्कीम चल रही हैं. इनमें रिटायमेंट की उम्र और लाभ अलग-अलग हैं. इससे पहले भी मैक्रों ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की चुनौती झेल चुके हैं. फ्रांस में असमानता के खिलाफ पिछले साल हुए इस आंदोलन ने सरकार को झकझोर कर रख दिया था.