एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए उसकी प्रति फाड़ दी. पीटीआई के मुताबिक नागरिकता विधेयक पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने कहा, ‘देश का एक और बंटवारा होने वाला है, यह कानून हिटलर के कानून से भी बदतर है, यह सरकार मुसलमानों को राष्ट्रविहीन बनाने की साजिश कर रही है.’

उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए आगे कहा, ‘नागरिकता विधेयक से देश को खतरा है, यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. महात्मा गांधी ने नागरिकता कार्ड को फाड़ा था और मैं आज इस विधेयक को फाड़ता हूं.’ ऐसा कहते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक की प्रति फाड़ दी.’

इस दौरान सदन में मौजूद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसका कड़ा विरोध किया और ओवैसी की इस हरकत को संसद का अपमान बताया. प्रसाद ने कहा, ‘असदुद्दीन ओवैसी लोकसभा के वरिष्ठ सदस्य हैं और आज उन्होंने जो किया है उससे सदन का अपमान हुआ है.’

इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया. जैसे ही विधेयक को पेश किया गया, विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया. कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस विधेयक के प्रावधानों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मकसद सिर्फ अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है.

हालांकि, गृह मंत्री ने इस आरोप को खारिज किया. उन्होंने कहा कि इस बिल से पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि वहां पर उनके साथ धार्मिकता के आधार पर अत्याचार नहीं होता है. भारी हंगामे के बीच गृहमंत्री अमित शाह का यह भी कहना था कि अगर धर्म के आधार पर कांग्रेस देश का विभाजन नहीं करती तो इस इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती. उनके इस बयान पर एक बार फिर विपक्ष की ओर से भारी विरोध हुआ.

नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी. यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था.