जेडीयू द्वारा लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किये जाने पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने निराशा जताई है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोगों से धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘जेडीयू के नागरिकता संशोधन विधेयक को समर्थन देने से निराश हुआ. यह विधेयक नागरिकता के अधिकार से धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. यह पार्टी के संविधान से मेल नहीं खाता जिसमें धर्मनिरपेक्ष शब्द पहले पन्ने पर तीन बार आता है. पार्टी का नेतृत्व गांधी के सिद्धांतों को मानने वाला है.’

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है. इसमें 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर मुस्लिमों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है. यानी उन्हें अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा. विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए लोकसभा में जेडीयू नेता राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन इसलिए कर रही है क्योंकि यह धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ नहीं है.

विपक्ष नागरिकता संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध कर रहा है. उसने इसे भारत के मूल विचार के खिलाफ बताया है. हालांकि सरकार ने इस आरोप को खारिज किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह विधेयक समाहित करने की भारत की प्राचीन परंपरा के अनुरूप ही है. गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है.

उधर, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में इस विधेयक का तीखा विरोध हो रहा है. वहां कई संगठनों का मानना है कि यह विधेयक वहां के मूल निवासियों के हितों के खिलाफ है. हालांकि बीते कुछ समय के दौरान सरकार ने उन्हें लगातार आश्वस्त करने की कोशिश की है.