लगातार गिरते राजस्व के कारण सरकार अगले सप्ताह जीएसटी की दरों और स्लैब में बड़ा बदलाव कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी परिषद की 18 दिसंबर को होने वाली बैठक में इन बढ़ी हुई दरों की घोषणा की जा सकती है.

केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के एक समूह ने मंगलवार को बैठक कर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने की अपनी सिफारिशों को अंतिम रुप दिया. जिनमें से एक यह है कि पांच प्रतिशत की दर को बढ़ाकर 8 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की दर को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाये. जीएसटी के तहत इस समय मुख्यत: चार दरें हैं - पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 और 28 प्रतिशत. इसके अलावा 28 प्रतिशत की श्रेणी में आने वाली माल एवं सेवाओं पर उपकर भी लिया जाता है. यह उपकर एक से लेकर 25 प्रतिशत तक लगाया जाता है. जानकारों के मुताबिक 28 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आने वाली कुछ वस्तुओं पर उपकर ( सरचार्ज) भी बढ़ाया जा सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि परिषद की बैठक में जीएसटी दरों को आपस में विलय कर उनकी संख्या मौजूदा चार स्लैब से घटाकर तीन भी की जा सकती है.

जीएसटी परिषद की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब जीएसटी संग्रह उम्मीद से कम रहा है और कई राज्यों का मुआवजा भी लंबित है. राज्य इसकी जल्द से जल्द इसकी भरपाई किये जाने की मांग कर रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से नवंबर की अवधि में केन्द्रीय जीएसटी प्राप्ति 2019- 20 के बजट अनुमान से 40 प्रतिशत कम रही है. इस अवधि में वास्तविक सीजीएसटी संग्रह 3,28,365 करोड़ रुपये रहा है जबकि बजट अनुमान 5,26,000 करोड़ रुपये रखा गया है.