दीवार पर चिपका हुआ यह केला असल में एक आर्ट इंस्टालेशन है जिसकी कीमत 1.2 लाख डॉलर यानी लगभग 85 लाख रुपए है. इटैलियन कलाकार माउरिश्यो कातेलान द्वारा बनाई गई यह कलाकृति बीते हफ्ते आर्ट बेसल का हिस्सा बनी थी. आर्ट बेसल फ्लोरिडा के मयामी बीच पर हर साल आयोजित होने वाला इंटरनेशनल आर्ट फेयर है. चार दिन चलने वाला यह प्रसिद्ध कला मेला इस साल छह दिसंबर से नौ दिसंबर के बीच आयोजित किया गया था. यहीं पर ‘कॉमेडियन’ शीर्षक वाली इस कलाकृति का भी प्रदर्शन हुआ जिसमें एक पका हुआ केला डक्टटेप से दीवार पर चिपकाया गया था. इसे देखकर सबसे पहले यही सवाल मन में आता है कि इसमें कला क्या है और कहां है. और, यही वह सवाल है जिससे कला जगत आजकल जूझता हुआ दिखाई दे रहा है.

यह केला-कृति माफ कीजिये कलाकृति सबसे पहले अपने बेतुकेपन के बावजूद इतनी ऊंची कीमत पर बिकने को लेकर चर्चा में आई थी. लेकिन यह उस समय और अधिक मशहूर हो गई जब कला प्रदर्शनी के दूसरे ही दिन एक अन्य कलाकार ने इसे दीवार से उखाड़कर खा लिया. अमेरिकी कलाकार डेविड डटूना, जो ऑप्टिकल लेंस के जरिए कलाकृतियां बनाने के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं, ने यह कहते हुए इस केले को खा लिया कि वे ‘हंग्री आर्टिस्ट’ नाम की आर्ट परफॉर्मेंस दे रहे हैं. कला जगत का एक तबका जहां इसे बेतुके आर्ट को मिली सही प्रतिक्रिया ठहराता नज़र आया, वहीं दूसरे को लगता है कि डटूना ने किसी तरह का जवाब देने के लिए नहीं बल्कि ‘कॉमेडियन’ को और मशहूर बनाने के लिए माउरिश्यो कातेलान और आर्ट गैलरी के साथ मिलकर यह काम किया. वैसे, अगर दूसरे तबके का अंदाजा सही है तो डटूना और कातेलान को अपने इरादों में उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली है. यहां पर यह भी बताते चलते हैं कि डटूना के खा जाने के बाद इस आर्ट इंस्टालेशन को एक दूसरे केले के साथ दोबारा तैयार कर दिया गया था.

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माउरिश्यो कातेलान की बात करें तो उनका परिचय देते हुए अक्सर आर्टिस्ट के साथ प्रैंकस्टर शब्द का इस्तेमाल भी किया जाता है. कातेलान कुछ महीने पहले तब चर्चा में आए थे जब उनके द्वारा बनाई गई सोने की एक टॉयलेट सीट इंग्लैंड में आयोजित एक कला प्रदर्शनी से चोरी हो गई थी. दरअसल 2016 में उन्होंने 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल कर एक फुल फंक्शनिंग टॉयलेट सीट बनाई थी. न्यूयॉर्क के गगेनहाइम म्यूजियम में रखी गई इस कलाकृति को कातेलान ने ‘अमेरिका’ नाम दिया था. सितंबर 2019 में इसे इंग्लैंड के ब्लेनहिम पैलेस में प्रदर्शित किया गया था जहां से यह चोरी हो गई.

जहां तक केले को दीवार पर चिपकाने में कला के मायने ढूंढने का सवाल है तो कुछ समीक्षक इसे मेल सेक्शुएलिटी से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ के लिए यह सहजता से उपलब्ध खाद्य सामग्री के सामने होकर भी ज़रूरतमंद को ना मिलने के प्रतीक की तरह है. ज्यादातर समीक्षक सलाह देते हैं कि कातेलान के इस आर्ट इंस्टालेशन का मतलब समझने के लिए उनके कुछ पुराने कामों को देखना और समझना ज़रूरी है. इनके मुताबिक कलाकृतियों को लटकाना जिसे कला की भाषा में सस्पेंशन कहा जाता है, माउरिश्यो कातेलान का पसंदीदा तरीका रहा है. 1997 में उन्होंने जानवरों और इंसानों के बीच संबंध दिखाने के लिए ‘नोवेसेंटो’ शीर्षक वाला एक आर्ट इंस्टालेशन तैयार किया था जिसमें उन्होंने असली से लगने वाले एक नकली घोड़े को छत से लटका दिया था.

इसी तरह 1999 में बनाई ऐसी ही दूसरी कृति में उन्होंने अपने गैलरी मालिक माशिमो डि कार्लो को ही डक्ट टेप के जरिए दीवार पर चिपका दिया था. अ परफेक्ट डे शीर्षक से बनाई गई इस कृति में कार्लो दिन भर यानी करीब 10 घंटे इसी तरह दीवार पर चिपके रहे थे. कातेलान की इन कृतियों के संदर्भ में इस केला-कृति को देखने की सलाह देने वाले समीक्षक यह इशारा भी करते हैं कि यह कला बाज़ार पर की गई व्यंगात्मक टिप्पणी है, जो कि अपनी ताज़ा या सुंदर सूरत के साथ आपके सामने है, लेकिन धीरे-धीरे इसका क्षय हो रहा है. कुल मिलाकर, कला जगत के जानकार इसे सिर्फ दीवार पर चिपका केला न मानकर इसके कई मतलब बताते दिखाई दे रहे हैं.

अब अगर इस आर्ट इंस्टालेशन के 85 लाख रुपये में बिकने की बात करें तो इसके कई पक्ष हैं. इनमें से पहला तो यही है कि कई लोग इसके बिकने पर ही संदेह जता रहे हैं. आर्ट फेयर में केवल यह जानकारी दी गई है कि एक आर्ट कलेक्टर ने इसे 1,20,000 डॉलर में खरीदा है लेकिन उस महिला का नाम कहीं पर भी नहीं बताया गया है. कला जगत को समझने वाले मानते हैं कि अगर यह कलाकृति सच में इतनी ऊंची कीमत पर बिकी है तो इसका उद्देश्य केवल अपने धन-बल का प्रदर्शन करना ही होगा. क्योंकि केला तो मुश्किल से दो-तीन दिन ही रखी जा सकने वाली चीज है.

अब सवाल उठता है कि अगर इसे सचमुच खरीदा गया है तो क्या खरीदने वाले ने एक सड़ा हुआ केला खरीदा होगा. इसका जवाब यह है कि खरीदने वाले को इस कलाकृति का सर्टिफिकेट मिला होगा. यानी जिसने भी 1.2 लाख डॉलर में इस कृति को खरीदा है, उसने वह विचार खरीदा है जो इससे व्यक्त किया गया है, न कि सिर्फ केला. यह और बात है कि आर्ट इंस्टालेशन के साथ खरीदने वाले को यह इंस्ट्रक्शन भी दिया गया है कि वह हर हफ्ते इस केले को बदल देगा और ऐसा करने के बाद भी इसे असली ही माना जाएगा. लेकिन यह मजेदार है कि केले के पीछे विचार क्या है, इसका अंदाजा भी ठीक से अब तक नहीं लगाया जा सका है.

फिलहाल, कला समीक्षकों और प्रशंसको के एक बड़े तबके द्वारा एब्सर्ड आर्ट यानी बेतुकी कला की श्रेणी में रखी गई यह कलाकृति, कला मेले में शामिल किसी भी और चीज से कहीं ज्यादा लोकप्रियता बटोर चुकी है. सोशल मीडिया पर भी, भले ही इसे ट्रोल करते हुए ही सही लेकिन दुनिया भर में लोग इसे अपने-अपने तरीके से री-क्रिएट कर रहे हैं. इसके लिए टमाटर, बियर कैन, स्लीपर्स को दीवार पर चिपकाने से लेकर चेरी, केला, बीन्स को चेहरे पर चिपकाने तक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैरती देखी जा सकती हैं.