लेखक-निर्देशक: गोपी पुथरण
कलाकार: रानी मुखर्जी, विशाल जेठवा, श्रुति बापना, दीपिका अमीन
रेटिंग: 3/5

करण जौहर ने अपनी आत्मकथा ‘एन अनसूटेबल बॉय’ में उनकी पहली फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ के बनने के बारे में विस्तार से लिखा है. वे लिखते हैं कि यह फिल्म बनाते हुए उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उन्हें कम कद और ज्यादा वजन वाली रानी मुखर्जी को इसमें हॉट-चिक दिखाना था. लेकिन रानी ने न केवल उन्हें पूरी तरह से गलत साबित किया बल्कि अपने बढ़िया अभिनय से टीना को एक यादगार किरदार भी बना दिया. दिलचस्प है कि यह बात रानी मुखर्जी पर आज भी जस की तस लागू होती है. साल 2014 में रिलीज हुई मर्दानी में जब वे पहली बार डीएसपी शिवानी शिवाजी राय बनकर सामने आई थीं तब भी उन्होंने लोगों को चौंकाया था और ढेर सारी तारीफें बटोरीं थी. अब ‘मर्दानी 2’ में आईपीएस बन चुकी शिवानी ने जिस तरह से वापसी की है, उससे पता चलता है कि उनके बिना इस फिल्म का बन पाना संभव नहीं था.

फिल्म में रानी मुखर्जी के कई दृश्य ऐसे हैं जब वे पुलिसिया तेवरों के साथ दौड़ती-भागती या बात करती हुई दिखाई देती हैं. इन दृश्यों में वे इतनी प्रभावशाली हैं कि पुलिस वाले भी उनसे यह सीख सकते हैं कि एक पुलिस अधिकारी बनने/दिखने के लिए हमेशा ऊंचे कद या रौबीली आवाज़ की ही दरकार नहीं होती है. हालांकि फिल्म ज्यादातर वक्त उन्हें तेज़-तर्रार ही दिखाना चाहती है लेकिन फिर भी इसमें सौम्यता मिलाकर वे जिस मिश्रण को परदे पर लाती हैं, वह उनसे नज़रें हटाने का मौका नहीं देता. बाकी, सुंदर तो वे हैं ही.

कहानी की बात करें तो मिसॉजनी यानी महिलाओं के प्रति दुर्भावना और उसके चलते होने वाली शारीरिक-मानसिक हिंसा ‘मर्दानी 2’ का मुख्य विषय है. फिल्म अपने पहले हिस्से में कई रेप विक्टिम्स और शिवानी शिवाजी राव के किरदार जरिए दिखाती है कि कैसे हमारे समाज में महत्वकांक्षी, तेज़-तर्रार और सीधी बात करने वाली महिलाओं को हमेशा कटघरे में खड़े किया जाता है. इस व्यथा को बताने वाला रानी मुखर्जी का एक मोनोलॉग भी फिल्म में रखा गया है लेकिन बहुत कुशलता से न लिखे जाने के चलते, यह उतना असरदार और यादगार नहीं बन पाता है. फिल्म का दूसरा हिस्सा इन महिलाओं के बराबरी हासिल करने के संघर्षों को समर्पित किया गया है. और, यह सुंदर विचार ही पटकथा की छोटी-मोटी खामियों को नज़रअंदाज करने की वजह दे देता है.

पटकथा और नायिका के बाद ‘मर्दानी 2’ की सबसे बड़ी खासियत इसका मजबूत और दुर्दांत खलनायक है. मासूम चेहरे और भूरी आंखों वाला, 21-22 साल का एक लड़का इस कहानी का विलेन, सनी है. शुरूआत में ही स्क्रीन पर एनसीआरबी का एक आंकड़ा रखकर फिल्म इतनी कम उम्र के विलेन को लिए जाने का कारण स्पष्ट कर देती है. इसमें बताया गया है कि भारत में बलात्कार के आधे मामलों में आरोपित की उम्र 18 साल कम होती है. अच्छा यह है कि फिल्म प्रामाणिकता के लिए न सिर्फ इस तथ्य का इस्तेमाल करती है बल्कि घटनाओं की सीक्वेंसिंग और उनके होने के तरीकों को भी असलियत के आसपास ही रखती है.

फिल्म पर लौटें तो मर्दानी 2 में सनी कई बार अभिनय की ‘ब्रेकिंग द फोर्थ वॉल’ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दर्शकों से सीधे रूबरू होता है और अपने साथ-साथ कहानी का ब्यौरा भी देता जाता है. सनी की भूमिका निभा रहे विशाल जेठवा ऐसे कई दृश्यों में जब अपना चेहरा एकदम सपाट रखते हैं तो देखने वाला एक अजब सी गिनगिनाहट से भर जाता है. इससे ठीक पहले वे डर और वीभत्सता से भरे दृश्यों में कमाल का अभिनय दिखा चुके होते हैं. और इतनी तेजी से बदले हुए उनके एक्सप्रेशन्स का दर्शकों पर एक अजब सा प्रभाव पड़ता है. यही वह वजह भी है कि आप खुद को इस किरदार से बहुत नफरत कर पाने से नहीं रोक पाते हैं. बीते चार-पांच सालों में टीवी इंडस्ट्री का पहचाना हुआ चेहरा बन चुके विशाल जेठवा इस फिल्म से बॉलीवुड में एक मजबूत कदम रखते दिखाई दे रहे हैं, दुआ की जानी चाहिए कि उन्हें ऐसी चैलेंजिंग भूमिकाओं के अकाल से ना जूझना पड़े.

बढ़िया पटकथा और अभिनय के अलावा ‘मर्दानी 2’ की तारीफ इसलिए भी की जानी चाहिए कि यह एक नायिका प्रधान फिल्म है. बॉलीवुड फिल्मों में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि हीरोइन, बगैर किसी हीरो या पुरुष सहायक के इतने हिंसक विलेन का सामना करती हुई दिखाई दे.

फिल्म के बाकी पक्षों की बात करें तो इसके संवाद थोड़े खटकने वाले ज़रूर हैं लेकिन ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि वे ज़रूरत से ज्यादा जानकारी देते हुए लगते हैं. इसके अलावा, फिल्म की लंबाई का कम होना और इसकी तेज़ रफ्तार के लिए भी इसे सराहा जा सकता है. संगीत की बात करें तो फिल्म में कोई भी गाना नहीं रखा गया है और बैकग्राउंड स्कोर भी इतना सहज-सटीक है कि अलग से ध्यान नहीं खींचता है. कुल मिलाकर, गोपी पुथरण निर्देशित ‘मर्दानी 2’ ढेर सारा सस्पेंस और रोमांच परोसती है. साथ ही, अपनी पूरी ताकत से नारा लगाती है - मिसॉजनी मुर्दाबाद!