केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है. झारखंड के गिरिडीह में आयोजित एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा, ‘हम नागरिकता संशोधन अधिनियम लेकर आए हैं और कांग्रेस को पेट दर्द होने लगा. वो उसके खिलाफ हिंसा भड़का रही है.’ अमित शाह ने आगे कहा, ‘मैं असम और (अन्य) पूर्वोत्तर राज्यों (के लोगों) को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनकी संस्कृति, सामाजिक पहचान, भाषा, राजनीतिक अधिकारों को नहीं छुआ जाएगा तथा नरेंद्र मोदी सरकार उनकी रक्षा करेगी.’

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर समूचे पूर्वोत्तर में उबाल है. असम से लेकर नगालैंड तक इसका बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है. अमित शाह ने कहा कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस मुद्दे को लेकर उनसे मुलाकात की है. गृह मंत्री का कहना था, ‘मैंने उन्हें समाधान ढूंढ़ने के लिए सकारात्मक रूप से मुद्दों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया.’

नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है. इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल भारत में निवास करने के बाद भारतीय नागरिकता दी जाएगी. पहले इसके लिए 11 साल देश में बिताने की जरूरत थी. संसद से पारित होने के बाद इस कानून पर इसी हफ्ते राष्ट्रपति की मुहर लगी है.