शिवसेना ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर मोदी सरकार माल एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजा का भुगतान करने में नाकाम रहती है तो इससे केंद्र और राज्यों के बीच संघर्ष छिड़ सकता है. शिवसेना ने यह भी कहा कि केंद्र की नीतियां देश में ‘आर्थिक अराजकता’ के लिए जिम्मेदार है.

पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में कहा, ‘जीएसटी लागू होने की वजह से राज्यों को होने वाले राजस्व के नुकसान के मद में 50,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने का केंद्र ने वादा किया था. लेकिन पिछले चार महीने से राज्यों को जीएसटी मुआवजा नहीं मिला.’ संपादकीय में कहा गया है, ‘यह पैसा राज्यों का है और इसके भुगतान में देरी से राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब हो सकती है. यदि संसाधनों में उनके (राज्यों के) उचित हिस्से नहीं दिए जाते हैं, जिसपर उनका अधिकार है, तो राज्यों को केंद्र के खिलाफ आवाज उठाना पड़ेगा.’

शिवसेना ने कहा कि भारत पेट्रोलियम जैसे मुनाफा में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचा जा रहा है और केंद्र के पास प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च 500 करोड़ रुपये एअर इंडिया को चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं. पार्टी ने कहा, ‘इसलिए, यह संदेह है कि राज्यों को जीएसटी मुआवजा मिलेगा.’1 जुलाई 2017 से लागू जीएसटी में राज्यों ने माल और सेवा पर कर वसूलने के अपने अधिकार केंद्र को इस शर्त पर सौंप दिए थे कि अगले पांच साल तक इसकी वजह से राजस्व को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी.