हथेली पर पाश

विदा लेते समय
यदि मैं जानती विदा लेने का यथार्थ
मेरा माथा चूम कर
तुम्हारे बिना मुड़े चले जाने से पूर्व
मैं तुम्हारी हथेली पर लिख देती
पाश की कविता
युद्ध के बीच
तुम्हें याद बना रहता
कि मुझे, तुम्हारे आंगन में तुम्हारा बच्चा खिलाने की मेरी ख़्वाहिश
और युद्ध के समूचेपन को
एक ही कतार में रख पाना
तुम्हारे लिए भी नहीं होगा संभव
और कुछ भी भुला नहीं सकेगी तुम्हारी दोस्त
तुम्हारे हिस्से का जी लेने का अर्थ होगा
पीछे रहकर भी तुम्हारे साथ-साथ चले जाना
मैंने तुम्हें मिलने से पहले
ख़ुद को तिनका-तिनका समेटा था
अपनी रातों की चांदनी बचाने के लिए
पीछे छोड़ दी थीं सुनहरी देहरियां
घर बनाने के लिए भी लड़ने पड़ते हैं युद्ध
पर तुम्हें मिलना
जीने पर ईमान ले आने जैसा था
युद्ध की सबसे भीषण विभीषिका है
विदा कह देना
सभी युद्ध अधूरे ही रहते हैं
उनमें नहीं होता समूचापन
लौट आना
तुम्हें विदा का शब्द न कहकर
मैंने तुम्हारे पास
विकल्प नहीं छोड़ा है

हैदराबाद के बाद

नेशन फ़र्स्ट, तुमने चुना
और तुम पर रुकते हुए मैंने
चुन लिया तुम्हारा देश
हां, मेरा कोई देश नहीं था
तुम जानते थे
आज जब मेरी हदों से दूर
तुम बचा रहे होगे यह देश
क्या तुम जानते हो
कि तुम्हारे पीछे
मुझे कोई नहीं बचाएगा?

नौ बोर की बंदूक

शहर में कुछ गांव रहते हैं
और उन गांवों में अनेकों क़स्बे, सूबे और मुल्क
मैं एक कमरे में रहती हूं
बहुत सी स्मृतियों के बीच
सुदूर सीमाओं पर बसे बांस के मकानों
फूस की छतों
और कच्ची ईंटों की दीवारों के
अवशेषों के मध्य
कोई जगह नहीं बचती किसी डर
या शुबहे के लिए
दिन भर इन खंडहरों को घर बनाने की मशक़्क़त के बाद
जब मैं जा लेटती हूं नींद की चौखट पर
कोई मेरा सिर उठाता है हलके हाथ से
और तकिए की तरह रख देता है
गारो की हरी पहाड़ियां
और बदन को ढांप देता है
अरब के नीले समंदर से
फिर वो आता है और सिमट जाता है
मेरे गर्दन और कंधे के बीच
नौ बोर की एक छोटी हाथबंदूक की तरह
ताकि मेरी रात
कोई लूट कर ले जा न सके

डाकघर और टेलीकॉम के बिना

इसी दुनिया में
हज़ारों मील के फ़ासले पर
कोई रहता है
पहुंच जाता है मुझ तक
पलक गिरने से पहले
डाकघर और टेलीकॉम के बिना
भेजता है चिट्ठियां और स्वर-संदेश
जिन्हें नहीं पढ़ सकती
कोई बूज़ एलन या ऐनलिटिका
एक और दुनिया है, इसी दुनिया में
जहां कोई जगह नहीं
सरहदों और सरकारों के लिए

तुम्हारी स्मृति के पैरों की ओर

मैंने कभी नहीं देखा तुम्हें ख़ुद से अलग
तुम्हारी अनुपस्थिति
तुम्हारे साथ होने का दूसरा अर्थ है
और तुम्हारी स्मृति तुम्हारी छाया
जिसे तुम छोड़ गए हो
अपनी पुरानी यूनिफ़ॉर्म की तरह
सिर्फ़ मेरे लिए
किसी-किसी दिन
जब तुम मुझे बहुत याद करते हो
बहुत मुस्कुराती है तुम्हारी तस्वीर
बोल पड़ती हैं तुम्हारी आंखें
खींच कर लगा लेती हैं गले
तुम्हारी बाहें
और इससे पहले कि छलक पड़े
भरा हुआ हृदय
मैं जा बैठती हूं बिस्तर के किनारे
तुम्हारी स्मृति के पैरों की ओर
टिका देती हूं उनपर अपना माथा
और देखती हूं
जीवन कितना सुंदर है

प्रतीक्षा

‪सबसे कठोर पहाड़ों के सीने से‬
बहती हैं
सबसे अबोध नदियां
तस्वीर पर से धूल पोंछते हुए
लिखी जा सकती हैं
सबसे मासूम कविताएं
बन्दूकें साफ़ करते हुए
देखे जा सकते हैं
सबसे कोमल स्वप्न
प्रतीक्षा
शब्दकोश का
सबसे करिश्माई शब्द है