बांग्लादेश ने कहा है कि वह भारत में अवैध तरीके से रह रहे अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार है. खबरों के मुताबिक वहां के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने यह बात कही है. उन्होंने कहा कि अगर भारत के पास ऐसे लोगों की सूची है तो वह उसे बांग्लादेश को दे. बांग्लादेश विदेश मंत्री का यह भी कहना था, ‘लेकिन हमारे नागरिकों के अलावा अगर कोई बांग्लादेश में घुसता है तो हम उसे वापस भेज देंगे.’

एके अब्दुल मोमेन का यह बयान नागरिकता संशोधन कानून पर मचे बवाल के बीच आया है. इससे पहले उन्होंने अपनी भारत यात्रा रद्द कर दी थी. साथ ही, उन्होंने बांग्लादेश की सहिष्णुता देखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कुछ वक्त बांग्लादेश में बिताने की नसीहत भी दी थी. इससे पहले संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान अमित शाह ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने का दावा किया था.

नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है. इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल भारत में निवास करने के बाद भारतीय नागरिकता दी जाएगी. पहले इसके लिए 11 साल देश में बिताने की जरूरत थी.