पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के कदमों की वजह से दक्षिण एशिया में एक बड़ा शरणार्थी संकट पैदा होने जा रहा है. मंगलवार को जेनेवा में यूएनएचसीआर, यूएन शरणार्थी एजेंसी और स्विटरजरलैंड सरकार ने संयुक्त रूप से पहले वैश्विक शरणार्थी फोरम का आयोजन किया था. इमरान ने इसी बैठक में भारत के नए नागरिकता कानून का मुद्दा उठाया.

सरकार संचालित रेडियो पाकिस्तान के अनुसार मंगलवार को फोरम को संबोधित करते हुए इमरान खान ने पहले कश्मीर का मुद्दा उठाया. इसके बाद उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के जनसांख्यिकी समीकरण को बदलने का है. इमरान खान ने कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं कि पूरे विश्व को (दक्षिण एशिया में) आसन्न सबसे बड़े शरणार्थी संकट के बारे में अवगत होना चाहिए.’

भारत के नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी पर टिप्पणी करते हुए खान ने कहा, ‘यदि दो-तीन प्रतिशत मुसलमान अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकते हैं तो यह एक बड़ी चुनौती होगी...मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे देखने को कहता हूं.’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘यदि विश्व भारत पर दबाव डाले तो इसे रोका जा सकता है. एक बार संकट शुरू होने पर हम इसे नहीं रोक सकते. यह जटिल और कठिन है.’

इमरान खान के इन बयानों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत के बिल्कुल अंदरूनी मामलों में अनावश्यक और अवांछित टिप्पणियां की हैं. इनका मकसद केवल कुछ ‘संकीर्ण’ राजनीतिक एजेंडों को आगे बढ़ाना है. इमरान खान ने जेनेवा में जो कुछ बोला है वह पूरी तरह से झूठ है.