चीन ने कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस कराने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है. ऐसा तब हुआ जब अन्य देशों ने उसका विरोध किया. इसके बाद चीन को कदम पीछे हटाने पड़े. चीन का प्रस्ताव था कि कश्मीर की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बंद कमरे में चर्चा हो. लेकिन अन्य देशों ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि यह दो देशों का आपसी मामला है. ब्रिटेन ने इस मामले में पहली बार भारत का खुले तौर पर साथ दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अन्य स्थायी सदस्य रूस ने भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होनी चाहिए.

यह मुद्दा ऐसे समय पर उठा है जब भारत सीमा विवाद को लेकर चीन के साथ बातचीत करने वाला है. इस हफ्ते चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर आएंगे. वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ सीमा वार्ता करेंगे. इससे पहले भी चीन ने 16 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था लेकिन भारत समर्थक देशों ने इसपर सार्वजनिक बहस या बयान जारी करने से मना कर दिया था.

कुछ खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि भारत उनके देश को विभाजित करने की तैयारी कर रहा है. इसमें कहा गया था कि भारत ने नियंत्रण रेखा के पांच सेक्टरों से आंशिक तौर पर बाड़बंदी हटा दी है कि और संभावना है कि वह कोई ऑपरेशन चला सकता है. कहा जा रहा है कि इसके बाद ही चीन ने सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने का फैसला किया.