बीते सोमवार को बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी की गिरफ्तारी न सिर्फ मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा बनी बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा जोर-शोर से हुई. उनके समर्थकों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया और उन्हें रिहा करने के लिए ट्विटर पर हैशटैग ‘आई स्टैंड विद पायल रोहतगी’ भी ट्रेंड करवाते दिखाई दिए. बीते हफ्ते रोहतगी के खिलाफ बूंदी (राजस्थान) में शिकायत दर्ज करवाई गई थी कि उन्होंने सोशल मीडिया पर नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की है. इसके बाद रविवार की शाम उन्हें गिरफ्तार कर आठ दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. हालांकि इसके दो दिन बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

यहां पर अगर गिरफ्तारी की वजह बने वीडियो पर बात करें तो इसमें पायल रोहतगी ने मोतीलाल नेहरू और उनके पारिवारिक जीवन से जुड़े कई दावे किए थे. उनकी टिप्पणियों में कितना तथ्य था, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इनमें रोहतगी ने मोहम्मद अली जिन्ना और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला को जवाहरलाल नेहरू का सौतेला भाई बताया था. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि पायल रोहतगी ने इस तरह से गांधी परिवार को निशाना बनाया हो. वे इससेे पहले भी गांधी परिवार, कांग्रेस समेत विपक्ष के बाकी दलों और बुद्धिजीवी तबके को अपने निशाने पर लेती रही हैं. इसके अलावा गोरक्षा, राम मंदिर, हिंदू राष्ट्र जैसे मुद्दे भी उनके वीडियोज का विषय रहे हैं.

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बिना लाग-लपेट कहें तो पायल रोहतगी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अक्सर उसी तरह की बातें करती हुई देखी-सुनी जा सकती हैं जिस तरह की बातें आजकल सरकार और उनके समर्थकों को आसानी से लुभाने के लिए की जाती हैं. पायल रोहतगी इसमें किस हद तक सफल हुई हैं इसका अंदाजा इससे लगता है कि ट्विटर पर भाजपा के कई छोटे-बड़े नेता, केंद्रीय मंत्री और आरएसएस के पदाधिकारी भी उन्हें फॉलो करते हैं. उनके फॉलोअर्स में से कई इन मायनों में विशेष हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं. इसके अलावा भी दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थन करने वाला एक बड़ा तबका उन्हें फॉलो करता है. रोहतगी बीते (सिर्फ) एक साल से खुलकर सरकार की नीतियों का समर्थन और हिंदुत्ववादी सोच को आगे बढ़ाने का काम अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए कर रही हैं.

बॉलीवुड में अपनी कोई मजबूत जगह बना पाने में सफल ना कही जा सकने वाली पायल रोहतगी का एकाएक सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो जाना कुछ चिंताजनक बातों की तरफ ध्यान खींचता है. इस थोड़े से समय में उन्हें मिली लोकप्रियता, नाम और देश के सबसे पॉवरफुल लीडर्स की गुडबुक्स में शामिल होना इसका एक शॉर्टकट भी सुझाता है. यह बताता है कि अगर आपने किसी भी वजह से तिल भर भी नाम कमा लिया है और इसके चलते लोग आपकी तरफ जरा भी खिंच सकते हैं तो आप एक खास रुझान की बातें करके एक बड़ी संख्या में न सिर्फ आम बल्कि कई खास लोगों का समर्थन भी हासिल कर सकते हैं. पायल रोहतगी के मामले में एक उदाहरण भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का दिया जा सकता है जो उनकी मदद के लिए पब्लिकली ट्वीट करने से भी नहीं हिचके.

और ऐसा करने के लिए आपको बहुत तथ्यपरक और संतुलित बातें करने या करने वाला दिखने की ज़रूरत भी नहीं हैं. एक आम नागरिक की अभिव्यक्ति के नाम पर पायल रोहतगी जिस तरह की बातें करती हैं, वे बेसिर-पैर की तो हैं लेकिन जाती सिर्फ एक दिशा में ही हैं इसलिए उस दिशा के लोग उनकी ऐसी बातों का भी समर्थन करते हैं.

पायल रोहतगी जैसे लोगों का कुछ ही महीनों में इतना लोकप्रिय होना और समर्थन पाना बताता है कि विश्वगुरू होने के हमारे दावे में कितना दम है. उन्हें फॉलो करने और उनका समर्थन करने वाले ज्यादातर लोग वे ही तो हैं जो इस तरह का दावा करते रहे हैं. लेकिन पायल जैसी बातें करने वाले लोगों का समर्थन करके ये लोग यह संदेश भी दे रहे हैं कि पढ़ने, गुनने और तर्क करने से इनका लेना-देना छूटता जा रहा है. अब हममें से ज्यादातर लोगों को अपने आस-पास सिर्फ अपनी तरह की बातें करने वाले लोग ही चाहिए. सोशल मीडिया पर अपने किसी हल्के या हिंसक विचार या पूर्वाग्रह को हजारों लोगों का समर्थन मिलता देख हमें लगता कि हम जिन विचारों को लेकर अब तक संकोच में रहा करते थे, वे तो बहुत सामान्य सी बातें हैं. फिर चाहे वह बात दूसरे धर्म के लोगों को आशंका की नज़रों से देखने की हो या इतिहास से जुड़ी काल्पनिक कहानियों को खरा-पूरा सच मानने की. इसके अलावा, रोहतगी जैसे लोग (ऐसे लोगों में सपा सांसद जया बच्चन भी शामिल हैं जिन्होंने संसद के अंदर ही बलात्कार के आरोपितों की मॉब लिंचिंग की मांग की थी) जिस तरह की कानून-व्यवस्था की मांग करते दिखाई देते हैं और हजारों की संख्या में उनके समर्थक इन मांगों को आगे बढ़ाते हैं, वह बताता है कि देश के कानूनों और संविधान पर श्रद्धा रखने का दिखावा करने का चलन भी अब खात्मे की ओर है.

देखने वाली बात यह होगी कि अब जब पायल रोहतगी रिहा हो चुकी हैं, और इस बहाने बतौर ‘हिंदू शेरनी’ काफी सुर्खियां भी बटोर चुकी हैं तो आगे उनका करियर क्या मोड़ लेता है. यह आलेख लिखे जाने तक उनके ट्विटर अकाउंट पर करीब पौने दो लाख फॉलोअर्स और यूट्यूब पर लगभग सवा लाख सब्सक्राइबर्स थे. आगे यह आंकड़ा अब कितनी तेज़ी से बढ़ता है और भविष्य में उन्हें किन मीडिया संस्थानों द्वारा टीवी डिबेट या इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, ये सब भी मिलकर उनकी आगे की दशा-दिशा तय करेंगे. आने वाले वक्त में वे अगर इस देश के ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में शामिल हो जाएं जो देश की दिशा निर्धारित करते हैं तो भी हमें ज्यादा आश्चर्य नहीं होना चाहिए.