असम में मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है. संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर 10 दिन पहले यह सेवा निलंबित कर दी गई थी. पीटीआई के मुताबिक निजी टेलिकॉम कंपनी एयरटेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार सुबह नौ बजे प्रतिबंध हटा दिया गया. उन्होंने कहा, ‘चूंकि हमें इंटरनेट बंद करने का कोई नया आदेश नहीं मिला था इसलिए हमने सुबह नौ बजे से प्रतिबंध हटा दिया.’ असम में ब्रॉडबैंड सेवा पहले ही बहाल हो चुकी है.

उधर, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि नागरिकता कानून बांग्लादेश से और लोगों के आने को बढ़ावा नहीं देता. उनके मुताबिक जो लोग बरसों पहले धार्मिक उत्पीड़न की वजह से पड़ोसी देश से भाग कर आए और राज्य में रह रहे हैं वे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे. उन्होंने यह बात इस कानून की वजह से अपनी पहचान खोने को लेकर चल रही मूल निवासी आबादी की आशंकाएं दूर करने के प्रयास में कही.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह तय है कि नागरिकता देने से हमारी सामाजिक संरचना पर कोई असर नहीं पड़ेगा. असम समझौते के अनुबंध छह में असम के लोगों के लिए संवैधानिक, विधायी, प्रशासनिक बचाव व्यवस्था है ताकि उनकी सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी विरासत सुरक्षित रह सके.’ सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सरकार हमेशा राज्य के लोगों के हितों के लिए काम करती रहेगी. मुख्यमंत्री ने आगे कहा. ‘मैंने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है क्योंकि समस्या का हल केवल बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है.’