नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं से घिरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में किसी भी तरह का कोई डिटेंशन सेंटर होने की बात को खारिज किया है. कल दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई एक रैली में उन्होंने कहा, ‘जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं. भाइयों और बहनों, उनसे नागरिकता कानून और एनआरसी दोनों का कोई लेना देना नहीं है. देश के मुसलमानों को ना डिटेंशन सेन्टर में भेजा जा रहा है, ना हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेन्टर है.’ नरेंद्र मोदी ने इस तरह की बातों को सफेद झूठ बताया. उधर, कांग्रेस ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि जरा सा गूगल सर्च करते ही प्रधानमंत्री का झूठ पकड़ा जा सकता है. यह खबर आज सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. इसके अलावा तीसरे एकदिवसीय मैच में वेस्टइंडीज को चार विकेट से हराकर भारत ने सीरीज 2-1 से जीत ली है. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

उपद्रवियों पर त्वरित कार्रवाई से उत्तर प्रदेश में हालात काबू

सीएए के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पुलिस-प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है. दैनिक जागरण के मुताबिक इसके चलते राज्य में हालात काफी सुधर गए हैं. लखनऊ और आसपास के जिलों में रविवार को शांति रही. मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और बागपत में भी हालात सामान्य रहे. पुलिस ने उपद्रव करने के आरोप अलग-अलग जगहों से सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा दंगाइयों की संपत्तियां भी सील की जा रही हैं.

मद्रास हाई कोर्ट ने तीन जजों को बर्खास्त किया

मंद्रास हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और अक्षमता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य में निचली अदालत के तीन जजों को बर्खास्त कर दिया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उसने सात अन्य जजों को सेवा विस्तार देने से इनकार भी कर दिया है. पहली बार उसने तीन बर्खास्त जजों में से एक खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत आपराधिक मामला चलाने की इजाजत भी दी है. एक अन्य जज की तनख्वाह में लगे बीते पांच इंक्रीमेंट खत्म कर दिए गए हैं. चार साल पहले मद्रास हाई कोर्ट ने 10 जिला जजों की सेवा समाप्त की थी.

कॉलेजों को अब यूनिवर्सिटी से मान्यता लेने की जरूरत नहीं

नई शिक्षा नीति-2020 तैयार कर ली गई है. दैनिक भास्कर के मुताबिक इसे अगले महीने कैबिनेट बैठक में लाने की तैयारी है. बताया जा रहा है कि इसका कैबिनेट नोट अंतिम चरण में है. मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इसमें 30 देशों की शिक्षा नीति के कुछ अंश शामिल किए गए हैं. कैबिनेट नोट के अनुसार सबसे बड़ा बदलाव कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर है. सरकारी और निजी कॉलेजों को अब किसी यूनिवर्सिटी से मान्यता लेने की ज़रूरत नहीं होगी. वे डिग्री भी अब खुद ही देंगे.