पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को प्रदर्शनकारियों ने आज भी जाधवपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया. पीटीआई के मुताबिक राज्यपाल विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में भाग लेने गए थे. तृणमूल कांग्रेस कर्मचारी संघ के प्रदर्शनकारियों ने धनखड़ को काले झंडे दिखाए और सुबह साढ़े दस बजे कैंपस के गेट नंबर पांच पर उनकी कार रोक दी. विरोध के बाद राज्यपाल को वापस जाना पड़ा.

जगदीप धनखड़ जाधवपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं. प्रदर्शनकारियों ने ‘वापस जाओ’ के नारे लगाए और ‘नो एनआरसी, नो सीएए’ की तख्तियां दिखाईं. उधर, जगदीप धनखड़ ने इस घटना को विश्वविद्यालय में कानून-व्यवस्था से समझौता बताया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं हैरान हूं कि कुलपति को नियम पुस्तिका के अनुसार चलने और दीक्षांत समारोह के संबंध में मेरे निर्देशों के बावजूद ऐसा किया गया. इस समय पूरी तरह असहाय महसूस करते हुए मैं यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर से जा रहा हूं.’ उन्होंने अपने ट्वीट में ममता बनर्जी को भी टैग किया.

सिलसिलेवार ट्वीट कर राज्यपाल ने जाधवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कुलपति घटना पर मूक दर्शक बने हुए हैं. उन्होंने लिखा, ‘ये हरकत उन ताकतों की है जो यह नहीं जानतीं कि इसका शिक्षा पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक रूप में क्या असर पड़ेगा.’

इस बीच, विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष देबराज देबनाथ ने कहा कि छात्रों ने राज्यपाल को परिसर में प्रवेश करने से नहीं रोका. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘हमले केवल तख्तियां दिखाईं और एनआरसी और सीएए के खिलाफ नारे लगाए.’ इससे पहले सोमवार को भी राज्यपाल से विश्वविद्यालय में धक्कामुक्की की गई और उन्हें काले झंडे दिखाए गए थे.

जाधवपुर विश्वविद्यालय संशोधित नागरिकता कानून यानी सीएए विरोधी प्रदर्शनों का बड़ा केंद्र रहा है. इससे एक दिन पहले जगदीप धनखड़ ने 24 दिसंबर को होने वाला विशेष दीक्षांत समारोह स्थगित करने के विश्वविद्यालय के फैसले को ‘अवैध और अमान्य’ बताया था. जगदीप धनखड़ विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय निर्धारण इकाई की एक बैठक में भाग लेने के लिए सोमवार को विश्वविद्यालय भी पहुंचे थे. लेकिन छात्रों और गैर शिक्षण कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने कुलपति सुरंजन दास से राजभवन में आकर बैठक करने का अनुरोध किया था. लेकिन सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह तय किया कि बैठक कहीं और नहीं हो सकती क्योंकि यह विश्वविद्यालय में शुरू हो चुकी है.