नए नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा को लेकर सेना प्रमुख बिपिन रावत का एक अहम बयान आया है. दिल्ली में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लोगों को हिंसा की तरफ ले जाने वालों को नेता नहीं कहा जा सकता. जनरल बिपिन रावत का कहना था, ‘नेतृत्व वह नहीं होता जो लोगों को गलत दिशा में लेकर जाए. आज हम सब देख रहे हैं कि बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्र कई शहरों में हिंसा और आगजनी करती भीड़ की अगुवाई कर रहे हैं. इसे नेतृत्व करना नहीं कहते.’ बिपिन रावत ने मुश्किल हालात में डटे सेना के जवानों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि लोग दिल्ली की ठंड से खुद को बचाने में जुटे हैं जबकि सियाचिन में जवान -10 से -45 डिग्री तापमान के बीच सरहद की रक्षा कर रहे हैं.

बिपिन रावत के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रतिक्रिया दी है. अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे सहमत हूं जनरल साहब, लेकिन वे भी नेता नहीं हो सकते जो अपने अनुयायियों को सांप्रदायिक आधार पर नरसंहार के लिए भड़काएं. क्या आप मुझसे सहमत हैं जनरल साहब?’ उधर, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सेना प्रमुख को नसीहत देते हुए एक ट्वीट में लिखा, ‘अपने पद के अधिकार क्षेत्र को समझना भी नेतृत्व है. यह नागरिक की सर्वोच्चता को समझना और जिस संस्था के प्रमुख आप हैं, उसकी गरिमा को ठीक से जानना भी है.’