निर्देशक: राज मेहता
कलाकार: अक्षय कुमार, करीना कपूर, दिलजीत दोसांझ, कियारा आडवाणी, आदिल हुसैन, टिस्का चोपड़ा
रेटिंग: 2.5/5

‘गुड न्यूज’ की पटकथा आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के आसपास रची गई है. इसलिए किसी भी और बात से पहले यह जान लेते हैं कि आईवीएफ क्या है. यह गर्भधारण की एक तकनीक है जिसमें कपल के एग्स और स्पर्म को मिलाकर शरीर के बाहर परखनली में भ्रूण विकसित किया जाता है. बाद में इसे मां के शरीर में ट्रांसफर कर दिया जाता है और इस तकनीक से पैदा हुए बच्चों को टेस्ट ट्यूब बेबी कहा जाता है. यह सब बताने की जरूरत इसलिए है क्योंकि ‘गुड न्यूज’ इस सारी प्रक्रिया में हो सकने वाली एक गलती को हमारे मनोरंजन का मुख्य मसाला बनाती है. हालांकि यहां पर खटकने वाली एक बात भी है. आईवीएफ से जुड़े तमाम अजीबो-गरीब किस्से अखबारों के हिस्से बनते ही रहते हैं. लेकिन फिल्म उनमें से किसी चटपटे किस्से को खुद में शामिल नहीं करती. वह सारा हास्य स्पर्म्स और एग्स के गलत कॉम्बिनेशन में मिल जाने के आस-पास, वर्डप्ले की मदद से रचती है.

कहानी पर आएं तो ‘गुड न्यूज’ मुंबई में रहने वाले क्लासी-अर्बन बत्रा कपल और चंडीगढ़ से आए लाउड-पंजाबी बत्रा कपल का किस्सा दिखाती है. ये जोड़े लंबे समय से बच्चे के लिए कोशिश कर रहे हैं. इनके बहाने फिल्म बच्चे की चाह रखने वाले जोड़ों का फ्रस्ट्रेशन और उन पर सोसायटी द्वारा बनाए जाने वाले दबाव को काफी मनोरंजनक तरीके से सामने लाती है. इसके अलावा, यह जरा प्रोग्रेसिव होते हुए अडॉप्शन जैसे विकल्पों की बात भी करती हैं और ‘अपना खून तो अपना खून होता है’ वाली मानसिकता से भी आपकी मुलाकात करवाती है. लेकिन ये सारी बातें ‘गुड न्यूज’ इतनी जल्दी में और ऊपर-ऊपर से करती है कि ये आपको प्रभावित करने के बजाय, कुछ ही मिनटों में दो-चार ठहाकों की कमाई कर आई-गई हो जाती हैं. फिर भी अच्छी बात यह है कि यह अपना ह्यूमर और इमोशन कोशंट बराबर मात्रा में रखती है, इसलिए बहुत सी घिसी-पिटी बातों को दोहराने के बावजूद अझेल नहीं होने पाती है.

अभिनय पर आएं तो फिल्म में करीना कपूर खान और अक्षय कुमार की जोड़ी, कुछ इस तरह के जोड़ों की प्रतिनिधि बनती है जिनमें पति ज्यादातर मौकों पर कान और ध्यान अलग-अलग जगह रखते हैं और पत्नियों को मजबूरी में उनके साथ मजबूती से काम लेना पड़ता है. इसके चलते दोनों के बीच बॉस और मातहत सरीखा रिश्ता बन जाता है. बॉस यानी पत्नी और मातहत यानी पति. फिल्म में इन दोनों के बीच की केमिस्ट्री ठीक-ठाक नज़र आती है. हालांकि करीना कपूर ज्यादातर दृश्यों में, बगैर मेहनत किए वैसी ही कॉन्फिडेंट अर्बन वुमन दिखती हैं जैसी वे असल में हैं, लेकिन कुछ इमोशनल दृश्यों में जब उनके भीतर की कमाल की अभिनेत्री निखरकर बाहर आती है तो आपका दिल खुश हो जाता है. अक्षय कुमार, अपनी भूमिका अच्छे से निभाते हैं लेकिन संवाद अदायगी से लेकर अपीयरेंस तक में, कहीं कोई एक्सपेरीमेंट नहीं करते हैं.

फिल्म में अक्षय और करीना की जोड़ी थोड़ी फीकी इसलिए लगती है क्योंकि उनके सामने शानदार केमिस्ट्री वाले दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी होते हैं. दिलजीत हमेशा की तरह खूब हंसाते हैं और आंखों को सुहाते हैं. खूबसूरत कियारा आडवाणी भी उनका बढ़िया साथ देती हैं लेकिन उनके हिस्से में बहुत कमाल दृश्य नहीं आए हैं. फिर भी अपने कॉमिक और इमोशनल, दोनों तरह के दृश्यों में वे दर्शनीय बनी रहती हैं.

गुड न्यूज के बाकी पक्षों की बात करें तो इसका संगीत, फिल्मांकन और प्रोडक्शन क्वालिटी जहां शानदार है. वहीं, इसके संवाद औसत कहे जा सकते हैं क्योंकि इनमें अच्छे और बुरे पंच बराबर मात्रा में हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि इनमें आईवीएफ पर बात करते हुए पीरियड्स, ओवरी, ओव्युलेटिंग जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल किया गया है. यानी ये हंसाने के साथ-साथ चुटकी भर ही सही, कुछ काम का भी बता जाते हैं.

निर्देशन पर आएं तो कपूर एंड संस, बेवकूफियां और आरक्षण जैसी फिल्मों में बतौर असिस्टेंट डॉयरेक्टर काम कर चुके राज मेहता ने इस फिल्म से बतौर निर्देशक डेब्यू किया है. इस हिसाब से यह क्वर्की कॉमेडी उनकी बढ़िया शुरूआत कही जा सकती है. लेकिन फिल्म में हर इमोशन का ओवर द टॉप होना, इसके प्रभाव और मनोरंजन की मात्रा दोनों को कम कर देता है. बेशक दो परिवारों की कहानी कहने वाली यह फिल्म क्रिसमस की छुट्टियों में देखी जा सकती है, लेकिन परिवार के साथ नहीं!