पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र की झांकी भी साल 2020 की गणतंत्र दिवस परेड में देखने को नहीं मिलेगी. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने गुरूवार को इसकी जानकारी दी. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर गैर-भाजपा शासित महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति देने से इनकार किया है.

पीटीआई के मुताबिक सुप्रिया सुले ने कहा कि दोनों राज्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी झांकियों को अनुमति नहीं देना, इन सूबों के लोगों का अपमान करने जैसा है.

महाराष्ट्र के बारामती से सांसद सुप्रिया ने मराठी में किए कुछ ट्वीट में लिखा, ‘केंद्र ने गणतंत्र दिवस पर परेड के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकियों को अनुमति नहीं दी है. यह देश का त्योहार है और केंद्र से सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की उम्मीद है. लेकिन सरकार पक्षपातपूर्ण तरीके से व्यवहार कर रही है और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों से सौतेला व्यवहार कर रही है.’

इस मामले पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘इस बार की परेड में महाराष्ट्र की झांकी को शामिल नहीं किया गया. यही कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ होता तो महाराष्ट्र भाजपा हमलावर हो जाती...ऐसा क्या हुआ कि इस बार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकी को जगह नहीं मिली. दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, यही कारण है. यह महाराष्ट्र का बड़ा अपमान है...मैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मामले की जांच करने की अपील करता हूं.’

इससे पहले गुरूवार को पश्चिम बंगाल की झांकी को शामिल न किये जाने की खबर आई थी. बताया जा रहा है कि झांकी को लेकर राज्य सरकार के प्रस्ताव को विशेषज्ञ समिति ने खारिज कर दिया. पश्चिम बंगाल सरकार लड़कियों के लिए चलाई जाने वाली ‘कन्याश्री’ नाम की योजना को गणतंत्र दिवस परेड में दिखाना चाहती थी.

पीटीआई के मुताबिक इस साल परेड समारोह के लिए कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे. इनमें से राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अलग-अलग मंत्रालयों के 22 प्रस्ताव को चुना गया है.

गणतंत्र दिवस परेड के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं. झांकियों का चयन एक विशेष समिति करती है जिसमें कला, संस्कृति, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला और नृत्यकला से संबंधित लोग शामिल होते हैं. यह समिति प्रस्तावों पर विचार कर अपनी सिफारिशों को रक्षा मंत्रालय को सौंपती है. समय संबंधी बाध्यता को देखते हुए झांकियों का चयन सीमित संख्या में ही होता है.