जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में रविवार रात को हिंसा भड़क गयी जब लाठियों से लैस कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया, परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जिसके बाद प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा. घटना के बाद कम से कम 28 घायलों को एम्स में भर्ती कराया गया है. हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष को सिर में चोट आई है. स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव का भी आरोप है कि जेएनयू परिसर के बाहर उन पर भी हमला किया गया.

इस बारे में जेएनयू प्रशासन का कहना है कि लाठियों से लैस नकाबपोश उपद्रवी परिसर के आसपास घूम रहे थे. वे संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और लोगों पर हमले कर रहे थे. वाम नियंत्रित जेएनयू छात्र संघ और आरएसएस समर्थित एबीवीपी ने करीब दो घंटे तक चली हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है.

जेएनयू परिसर में हिंसा भड़कने के बाद जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘पूरे जेएनयू समुदाय के लिए अत्यावश्यक संदेश है कि परिसर में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो गयी है. लाठियों से लैस कुछ नकाबपोश उपद्रवी आसपास घूम रहे हैं, संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं और लोगों पर हमले कर रहे हैं. जेएनयू प्रशासन ने व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस को बुलाया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह शांति बनाये रखने और चौकन्ना रहने का क्षण है. उपद्रवियों से निपटने के लिए प्रयास चल रहे हैं.’’

पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जेएनयू शिक्षक संघ द्वारा बुलाई गई बैठक के दौरान यह झड़प हुई. इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर आर महालक्ष्मी ने घटना का ब्यौरा देते हुए कहा, ‘‘हमने टी प्वाइंट पर शाम पांच बजे एक शांति बैठक आयोजित की थी. जैसे ही यह खत्म हुई, बड़ी संख्या में लोग परिसर में दाखिल हुए और उन्होंने शिक्षकों और छात्रों पर मनमाने ढंग से हमला करना शुरू कर दिया.’’

एक अन्य प्रोफेसर प्रदीप शिंदे ने कहा, ‘‘हमें इस बात पर आश्चर्य है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग हाथों में छड़ें लिए कैंपस में कैसे घुसे. मुझे लगता है कि वे ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जो हमेशा हमें देशद्रोही कहते हैं.’’

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नकाबपोश भीड़ द्वारा छात्रों पर हमले का एक वीडियो

जेएनयू छात्र संघ के मुताबिक एबीवीपी के सदस्य नकाब पहनकर परिसर में लाठियां, रॉड लेकर घूम रहे थे. छात्र संघ का यह भी कहना है कि एबीवीपी के लोग ‘‘ईंट-पत्थर फेंक रहे थे. छात्रावासों में घुसकर छात्रों को पीट रहे थे और कई शिक्षक की भी पिटाई की गयी.’’ जेएनयू छात्र संघ ने अपने बयान में यह भी कहा है कि एबीवीपी के गुंडे जब दूसरे छात्रों को मार रहे थे तब दिल्ली पुलिस इसमें उनका सहयोग कर रही थी.

उधर, एबीवीपी ने दावा किया है कि वामपंथी छात्र संगठनों एसएफआई, आईसा और डीएसएफ के सदस्यों ने उन पर बुरी तरह हमला किया. एबीवीपी के मुताबिक, ‘‘हमले में हमारे करीब 25 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गये और 11 छात्रों का अता-पता नहीं है. छात्रावासों में कई एबीवीपी सदस्यों पर हमले हो रहे हैं तथा वामपंथी गुंडे छात्रावासों में तोड़फोड़ कर रहे हैं.’’

विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश की सत्ता पर काबिज फासीवादी लोग बहादुर छात्रों की आवाज़ से डरते हैं. जेएनयू में आज की हिंसा उसी डर को दिखाती है.

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने इस घटना की निंदा की है और कहा है कि हालात पर करीब से नजर रखी जा रही है. बैजल ने ट्वीट करके कहा कि ‘‘जेएनयू में छात्रों और शिक्षकों पर हमला अत्यंत निंदनीय है. दिल्ली पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाये रखने तथा हिंसा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जेएनयू प्रशासन के साथ मिलकर हरसंभव कदम उठाने का निर्देश दिया. हालात पर करीब से नजर रखी जा रही है.’’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट करके कहा है कि ‘मैं जेएनयू में हिंसा के बारे में जानकर स्तब्ध हूं. छात्रों पर जघन्य तरीके से हमला किया गया. पुलिस को हिंसा तत्काल रोकनी चाहिए और शांति बहाल करनी चाहिए. अगर हमारे छात्र विश्वविद्यालय परिसर के अंदर सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश कैसे प्रगति करेगा.’’

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि जेएनयू के छात्रावासों में नकाबपोश लोगों के घुसने और छात्रों पर हमले करने का सीधा प्रसारण टीवी पर देखना भयावह था और ऐसा केवल सरकार की मदद से ही हो सकता है. पूर्व वित्त मंत्री ने इस संबंध में ट्वीट किया, ‘‘हम टीवी पर जो सीधा प्रसारण देख रहे हैं, वह स्तब्ध करने वाला और भयावह है. नकाबपोश लोग जेएनयू के छात्रावासों में घुसे और छात्रों पर हमले करने लगे. पुलिस क्या कर रही है? पुलिस आयुक्त कहां हैं?’’

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी जेएनयू की हिंसा के लिए एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों ने इसकी साजिश रची है. उन्होंने कहा, ‘‘नकाबपोश हमलावर जेएनयू में घुस गये जबकि कानून लागू करने वाले वहां थे. यह वीडियो बताता है कि आरएसएस और भाजपा भारत को क्या बनाना चाहती है. उन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा.”

पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह भी बताया है कि गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक से इस संबंध में बात की है और गृह मंत्रालय ने जेएनयू में हिंसा पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट भी मांगी है. इसके अलावा जेएनयू और उसके आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और संस्थान के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया है