राजस्थान के कोटा स्थित एक राजकीय अस्पताल में 100 से अधिक बच्चों की मौत की हैरान करने वाली खबरें आने के बाद अब गुजरात के राजकोट से भी ऐसी ही खबर आई है. पीटीआई के मुताबिक जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में बीते दिसम्बर में 111 शिशुओं की मौत हो गई. इसके अलावा अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भी पिछले महीने 88 शिशुओं की मौत होने की खबर है.

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल द्वारा साझा किये गये आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष दिसम्बर में राजकोट के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जनरल हॉस्पिटल में 388 शिशु भर्ती हुए थे जिनमें से 111 या 28 प्रतिशत की मृत्यु हो गई. आंकड़ों से यह पता चलता है कि गत वर्ष अक्टूबर और नवम्बर में यहां क्रमश: 87 और 71 शिशुओं की मौत हुई थी. इसके हिसाब से अस्पताल के ‘सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट’ (एसएनसीयू) में भर्ती शिशुओं में से इन दो महीनों में क्रमश: 19.3 और 15.5 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु हुई.

अगर अहमदाबाद से जुड़े आंकड़ों की बात करें तो यहां के सिविल अस्पताल में दिसम्बर में 88 शिशुओं की मौत हो गई जो भर्ती किये गए 415 शिशुओं का 21.2 प्रतिशत है. इससे पहले अक्टूबर और नवम्बर के महीनों में यहां क्रमश: 91 और 74 शिशुओं की मौत हुई जो अस्पताल में भर्ती हुए शिशुओं की कुल संख्या का क्रमश: 18.4 और 16.4 प्रतिशत थी.

नितिन पटेल के मुताबिक इतनी अधिक संख्या में बच्चों की मौतें होने की एक वजह ठंड भी है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में समग्र शिशु मृत्यु दर पहले के मुकाबले कम हुई है. इस संबंध में उनका यह भी कहना था कि केंद्र द्वारा जारी 2017 के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना की शिशु मृत्यु दर गुजरात से अधिक है.

इस मामले में कांग्रेस के भाजपा सरकार पर हमले के जवाब में नितिन पटेल का कहना था, ‘‘वे राजस्थान से ध्यान बंटाने का प्रयास कर रहे हैं. मैं राजस्थान और मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकारों से पूछना चाहता हूं कि इन पड़ोसी राज्यों से मरीज इलाज के लिए गुजरात के अस्पतालों में क्यों आते हैं?’’

इस मुद्दे पर जब संवाददाताओं ने वडोदरा में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से सवाल करने चाहे तो वे उनके सवालों का कोई जवाब दिये बिना वहां से चले गए.

उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावडा इसे बेहद गंभार मामला बताते हुए कहते हैं कि ‘‘राजकोट और अहमदबाद के दो सरकारी अस्पतालों में 219 शिशुओं की मौत हुई है और यदि पूरे राज्य के अस्पतालों को संज्ञान में लिया जाए तो यह संख्या हजारों में हो सकती है.’’ वे सवाल करते हुए कहते हैं, ‘‘क्या सरकार को इस बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए, विशेष तौर पर तब जब प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री दोनों गुजरात से हैं?’’