‘सालों को हॉस्टल में घुसके तोड़े.’

‘बिल्कुल... एक बार ठीक से आर-पार करने की ज़रूरत है. अभी नहीं मारेंगे सालों को तो कब मारेंगे. गंद मचा के रख दिया कॉमियों (कम्युनिस्ट) ने.’

ये लाइनें उस व्हाट्सएप चैट का हिस्सा हैं जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा के बाद मारपीट करने वालों के बीच हुई थी. सोशल मीडिया पर हिंसा की तमाम तस्वीरों और वीडियोज के बीच, व्हाट्सएप चैट के इस तरह के स्क्रीनशॉट्स भी वायरल हो रहे हैं. इन स्क्रीनशॉट्स के बारे में दो तरह के दावे किए जा रहे हैं. जेएनयूएसयू सहित सोशल मीडिया पर एक बड़ा तबका जहां यह दावा करता है कि यह दक्षिणपंथी छात्र संगठन, एबीवीपी के छात्रों की बीच हुई बातचीत है. वहीं शुरूआत में एबीवीपी और उसके समर्थक ऐसी चैट्स को फर्जी बता रहे थे और अब उनका कहना है कि यह कांग्रेस और वामपंथियों द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिशों का हिस्सा है.

इस लेख की शुरुआत में दी गई व्हाट्सएप चैट के नीचे दिये गये स्क्रीनशॉट पर गौर करें तो इसमें ‘सालों को हॉस्टल में घुसके तोड़े’ कहने वाले व्यक्ति का नाम सौरभ दुबे नजर आता है. सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोल.इन ने इसकी पड़ताल नंबरों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल होने वाले एप ट्रूकॉलर के अलावा फेसबुक-ट्विटर के जरिये भी की. ट्रूकॉलर पर भी यह नंबर सौरभ दुबे के नाम ही दर्ज है. फेसबुक पर इस नंबर से जुड़े अकाउंट से पता चलता है कि सौरभ दुबे, दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह इवनिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और फेसबुक पर ‘जेएनयूआइट्स फॉर मोदी’ नाम का ग्रुप चलाते हैं.

व्हाट्सएप चैट के वायरल स्क्रीनशॉट
स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रहे नंबर से जुड़ा सौरभ दुबे का ट्विटर अकाउंट

इसी तरह के एक और स्क्रीनशॉट में ‘फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में एक व्यक्ति कहता है, ‘डीयू के लोगों की एंट्री खजान सिंह स्विमिंग साइड से करवाइए, हम लोग यहां 25-30 लोग हैं.’ जिस नंबर से यह संदेश भेजा गया है, ट्रूकॉलर इसकी पहचान विकास पटेल के रूप में करवाता है. विकास पटेल के फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वे एबीवीपी के सदस्य हैं और जेएनयू एबीवीपी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. इंटरनेट पर और भी कई ऐसी जानकारियां हैं जो उन्हें एबीवीपी से जोड़ती हैं.

व्हाट्सएप चैट के वायरल स्क्रीनशॉट

एक अन्य ग्रुप ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ की बातचीत में एक व्यक्ति पूछता नज़र आता है कि ‘पुलिस तो नहीं आ गई. भाई इस ग्रुप में भी लेफ्टिस्ट आ गए. लिंक क्यों शेयर किया जा रहा.’ ट्रूकॉलर के मुताबिक यह नंबर ओंकार श्रीवास्तव का है. ओंकार, एबीवीपी दिल्ली की कार्यकारी कमेटी का सदस्य होने के साथ-साथ जेएनयू एबीवीपी के जॉइंट सेक्रेटरी भी रह चुके हैं. स्क्रोल के मुताबिक सौरभ दुबे, विकास पटेल और ओंकार श्रीवास्तव से संपर्क करने पर उनके मोबाइल नंबर बंद मिले. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब उसने सौरभ दुबे से संपर्क किया तो उनका कहना था कि वे नोएडा में रहते हैं और फिर तुरंत ही उन्होंने फोन काट दिया.

ऊपर दिये गए उदाहरणों के अलावा भी इन चैट्स में ऐसे तमाम नाम शामिल नजर आते हैं जो किसी न किसी तरह दक्षिणपंथी राजनीतिक समूहों से जुड़ते हुए दिखाई देते हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट.’ को जो लोग मैनेज करते हैं उनमें से कम से कम छह ऐसे हैं जो एबीवीपी के पदाधिकारी हैं या अतीत में रहे हैं. एबीवीपी की जेएनयू इकाई के विभाग संयोजक विजय कुमार उनमें से एक हैं. इसी ग्रुप के एक और एडमिन हैं मनीष जांगिड़. वे 2019 के छात्र संघ चुनावों में अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी के उम्मीदवार थे. इस कड़ी में एक और नाम वैलेंटिना ब्रह्मा का है. वे एबीवीपी दिल्ली की महिला इकाई की संयोजक हैं. हालांकि इन सभी का कहना है कि इन्हें किसी और ने इस ग्रुप से जोड़ दिया था.

यहां एक दिलचस्प बात यह भी है कि जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर धनजंय सिंह भी व्हाट्सएप ग्रुप ‘फ्रेंड्स ऑफ आरएएस’ का हिस्सा थे. इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में उनका कहना था कि वे इस ग्रुप के सक्रिय सदस्य नहीं थे और अब वे इसमें शामिल भी नहीं हैं. धनंजय सिंह 2004 में एबीवीपी की तरफ से छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं.

व्हाट्सएप चैट के वायरल स्क्रीनशॉट और ओंकार श्रीवास्तव से जुड़ा ट्वीट

कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की बातचीत तब बाहर आ गईं जब एबीवीपी और आरएसएस से बाहर के लोगों ने इन व्हाट्सएप समूहों को जॉइन कर लिया. ग्रुप का हिस्सा बनने वाले कई लोगों का सोशल मीडिया पर कहना है कि जैसे ही यह बात पकड़ में आई, इसके बाद ताबड़-तोड़ कई लोगों को इन व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ लिया गया और इनमें से कुछ का नाम भी बदल दिया गया. इसकी वजह यह बताई जा रही है कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान के बारे में भ्रम पैदा करने के लिए ऐसा किया गया.

इस चर्चा में कांग्रेस से जुड़े आनंद मंगनाले का जिक्र भी आता है. मंगनाले एक व्हाट्सएप ग्रुप की चैट में यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि ‘वीसी अपना आदमी है.’ लेकिन बाद में उन्होंने ट्विटर पर इस बात की सफाई देते हुए लिखा कि वे दक्षिणपंथी लोगों के समूह में सक्रियता सिर्फ इसलिए दिखा रहे थे जिससे अधिक से अधिक जानकारी बाहर निकालकर लोगों को हिंसा के बारे में आगाह कर सकें. मंगनाले का यह दावा कितना सही है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि वे अपनी बात पर कायम नही रहे और बाद में अपने ट्वीट भी डिलीट कर दिए. ऐसा तब हुआ जब उनका नाम आने के बाद कांग्रेस को अपने आधिकारिक हैंडल से यह सफाई तक देनी पड़ गई कि पार्टी का उनसे कोई संबंध नहीं है.