जेएनयू में बीते रविवार को हुई हिंसा पर घमासान जारी है. इस बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर बताती है कि भाजपा समर्थित एबीवीपी के कम से कम छह पदाधिकारी, जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर, दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध एक कॉलेज के शिक्षक और दो पीएचडी छात्र तीन ऐसे वाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे जिनमें बीते रविवार को हिंसा की धमकी देते मैसेज चल रहे थे. हिंसा से पहले ये तीनों ग्रुप खूब सक्रिय थे. बल्कि इनमें तब भी मैसेज भेजे जा रहे थे जब नकाबपोश हमलावर जेएनयू कैंपस में घुसकर उपद्रव कर रहे थे.

जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर धनजंय सिंह ‘फ्रेंड्स ऑफ आरएएस’ नाम के एक ऐसे ही वाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे. अखबार से बातचीत में उन्होंने ग्रुप का हिस्सा होने की बात तो मानी है, लेकिन यह भी कहा है कि उन्हें ग्रुप में हुई बातचीत के बारे में जानकारी नहीं है. धनंजय सिंह का कहना था, ‘मैं ग्रुप का सक्रिय सदस्य नहीं हूं और अब मैं इसे छोड़ चुका हूं. अभी मेरे लिए सबसे अहम यह है कि शांति बहाल की जाए. ग्रुप कोई भी रहा हो, वे सभी मेरे छात्र हैं.’ उन्होंने यह भी कहा, ‘लोग आपको ऐसे ग्रुप में जोड़ देते हैं और अक्सर ही ऐसा होता है कि आप देखते भी नहीं कि क्या संदेश भेजे जा रहे हैं.’ धनंजय सिंह 2004 में एबीवीपी की तरफ से छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं.

इसी तरह का एक दूसरा ग्रुप है ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट.’ इसके एडमिन जो लोग हैं उनमें से कम से कम छह ऐसे हैं जो एबीवीपी के पदाधिकारी हैं या अतीत में रहे हैं. एबीवीपी की जेएनयू इकाई के विभाग संयोजक विजय कुमार उनमें से एक हैं. इस बारे में उनका कहना था, ‘मुझे किसी अज्ञात नंबर से ग्रुप में जोड़ा गया और इसका एडमिन बना दिया गया. जब मैंने यह देखा तो मैंने तुरंत ही वह ग्रुप छोड़ दिया था. अब मुझे अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकी भरे फोन आ रहे हैं.’ विजय कुमार जेएनयू से पीएचडी कर रहे हैं और यह उनका आखिरी साल है.

इसी ग्रुप के एक और एडमिन हैं मनीष जांगिड़. वे 2019 के छात्र संघ चुनावों में अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी के उम्मीदवार थे. संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस ग्रुप में तब जोड़ा गया जब उनका फोन टूट गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम ‘लेफ्ट’ का है.

इसी कड़ी में एक और नाम वैलेंटिना ब्रह्मा का है. वे एबीवीपी दिल्ली की महिला इकाई की संयोजक हैं. उनके मुताबिक रविवार को साढ़े पांच बजे उन्हें ग्रुप में जोड़ा गया था. वैलेंटिना के मुताबिक उन्होंने देखा कि बाकी एडमिन भी एबीवीपी के लोग ही हैं इसलिए उन्हें पहले कोई शक नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने हिंसा वाले मैसेज देखे तो वे समझ गईं कि ग्रुप को ‘लेफ्ट ने हाइजैक’ कर लिया है. उनका कहना था, ‘इसके बाद मैंने लोगों को हटाना शुरू कर दिया. तभी किसी ने मुझे बतौर एडमिन हटा दिया. उसके बाद मैं खुद ही ग्रुप से बाहर हो गई. सिर्फ एक एडमिन ही किसी दूसरे एडमिन को हटा सकता है तो साफ था कि ग्रुप पर किसका कब्जा हो गया था.’

ऐसा ही एक तीसरा ग्रुप था ‘लेफ्ट टेरर डाउन डाउन’. इसमें भी बाकी दो ग्रुप्स जैसी ही गतिविधियां चल रही थीं. इसका नाम कम से कम तीन बार बदला गया. पहले इसे ‘संघी गून्स मुर्दाबाद’ किया गया और फिर ‘एबीवीपी छी छी’. इसके बाद इसका पुराना नाम ही बहाल कर दिया गया. ऐसा करने वाले केरल के कबीर छंगाथरा केरल के एक बेरोजगार युवा हैं. उनके मुताबिक एक संपर्क के जरिये वे इस ग्रुप में आए थे और फिर उन्होंने एबीवीपी का विरोध करने के लिए इसका नाम बदला.

इन्हीं में से एक वाट्सएप ग्रुप में रविवार को ‘सालों को हॉस्टल में घुस के तोड़ें’ मैसेज भेज गया था. इसे शहीद भगत सिंह इवनिंग कॉलेज में पढ़ा रहे एक असिस्टेंट प्रोफेसर सौरभ दुबे ने भेजा था. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब इस शख्स से संपर्क किया गया तो उसका कहना था कि वह नोएडा में रहता है और फिर तुरंत ही उसने फोन काट दिया. फेसबुक पर यह शख्स खुद को भाजपा से जुड़ा बताता है.