इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों पर हुए कथित लाठी चार्ज मामले की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को सौंप दी है. मंगलवार को प्रयागराज के मोहम्मद अमन खान की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया. पीठ ने कहा कि आयोग इस याचिका के मेमो को जांच के उद्देश्य के लिए शिकायत के तौर पर मानेगा. अदालत ने याचिका पर अगली सुनवाई 17 फरवरी, 2020 तय करते हुए आयोग से एक महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा है.

पीटीआई के मुताबिक मंगलवार को अदालत ने कहा, ‘एनएचआरसी की शक्तियों को देखते हुए इस चरण में हम कोई विशेष जांच टीम गठित करने के इच्छुक नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मामले की जांच एनएचआरसी से कराना चाहेंगे. हम राज्य मानवाधिकार आयोग से भी जांच करा सकते थे, लेकिन चूंकि एनएचआरसी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों और कुछ अध्यापकों की एक शिकायत पर पहले से ही इस तरह के आरोपों की जांच कर रहा है, हम इस मामले की भी जांच उसी से कराना उचित समझते हैं.’

मोहम्मद अमन खान ने अपनी याचिका में कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र 13 दिसंबर से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे. 15 दिसंबर को ये छात्र मौलाना आजाद पुस्तकालय पर एकत्रित हुए और विश्वविद्यालय गेट की ओर मार्च किया. याचिकाकर्ता का आरोप है कि जब ये मार्च विश्वविद्यालय के गेट पर पहुंचा तो वहां तैनात पुलिस ने छात्रों को उकसाना शुरू कर दिया, लेकिन छात्रों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. कुछ समय बाद पुलिस ने छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए और उन पर लाठियां बरसाईं जिसमें करीब 100 छात्र घायल हो गए.

इससे पहले बीती दो जनवरी को इस मामले में अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया था और पुलिस कार्रवाई का बचाव किया था. उन्होंने दलील दी थी कि विश्वविद्यालय का गेट छात्रों द्वारा तोड़ दिया गया था और विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस ने हिंसा में लिप्त छात्रों को काबू में करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया. मनीष गोयल का कहना था कि इस दौरान पुलिस द्वारा कोई अतिरिक्त बल प्रयोग नहीं किया गया था.