कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज विभिन्न श्रमिक संगठनों की ओर से बुलाये गये भारत बंद का समर्थन किया है. उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) को कमजोर करने का आरोप भी लगाया. राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा, ‘मोदी-शाह सरकार की जन और श्रमिक विरोधी नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि इन्हें मोदी के पूंजीपति मित्रों को बेचने को सही ठहराया जा सके.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘आज 25 करोड़ कामगारों ने इसके विरोध में भारत बंद बुलाया है. मैं उन्हें सलाम करता हूं.’

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ देश के प्रमुख मजदूर संघों इंटक, सीटू, सेवा, एआईटीयूसी, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी ने आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. उनका दावा है कि इस में 25 करोड़ श्रमिक शामिल होंगे. मजदूर संगठनों के साथ ही वामपंथी दलों और कांग्रेस समर्थकों के प्रदर्शनों के चलते पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में सड़क और रेल यातायात बाधित होने की खबर है. पीटीआई के मुताबिक हड़ताल समर्थकों ने राज्य के कुछ हिस्सों में रैलियां निकालीं. वे सड़कों और रेलवे पटरियों पर भी जमा हो गए. हालांकि, पुलिस ने तत्काल वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें हटा दिया. उत्तर 24 परगना में हृदयपुर स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक से पुलिस को चार देसी बम बरामद हुए हैं.

मजदूर संघ क्या कह रहे हैं?

मजदूर संघों का आरोप है कि सरकार नए इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल के जरिये श्रम कानून में बदलाव करके उनके अधिकारों का हनन कर रही है. इसके विभिन्न प्रावधानों में औद्योगिक संस्थानों में हड़ताल करने को कठिन बनाया गया है जबकि बर्खास्तगी को आसान. मजदूर संघों के मुताबिक लेबर कोड के नाम पर मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है. उनकी मांग है कि बेरोजगारी खत्म हो, न्यूनतम मजदूरी तय की जाए और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो. वे सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपये प्रति महीना करने की मांग कर रहे हैं. मजदूर संघ रेलवे, पेट्रोलियम, रक्षा और बीमा क्षेत्र के निजीकरण का भी विरोध कर रहे हैं.