मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ इंटक और सीटू सहित देश के सभी प्रमुख मजदूर संघों ने आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. उनका दावा है कि इसमें 25 करोड़ श्रमिक शामिल हो रहे हैं. आइए देखें इसका कहां क्या असर हो रहा है.

राजस्थान

राजस्थान में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला है. बंद के शुरुआती घंटों में बैंकिंग और रोडवेज सेवाओं पर आंशिक असर देखने को मिला. जयपुर में बैंक और एलआईसी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया. राजस्थान रोडवेज के सीटू से संबद्ध करीब 3,000 कर्मचारी भारत बंद में भाग ले रहे हैं. इसका असर कई इलाकों में बस सेवाओं पर पड़ा है. हालांकि जयपुर शहर में बाजार खुले हैं और यहां सार्वजनिक परिवहन सेवा पर ज्यादा असर नहीं दिख रहा.

पश्चिम बंगाल

मजदूर संगठनों के साथ ही वामपंथी दलों और कांग्रेस समर्थकों के प्रदर्शनों के चलते पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में सड़क और रेल यातायात बाधित होने की खबर है. हड़ताल समर्थकों ने राज्य के कुछ हिस्सों में रैलियां निकालीं. वे सड़कों और रेलवे पटरियों पर भी जमा हो गए. हालांकि, पुलिस ने तत्काल वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें हटा दिया. उत्तर 24 परगना में हृदयपुर स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक से पुलिस को चार देसी बम बरामद हुए हैं. उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंद के लिए वामदलों और कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जो बंद की कोशिश कर रहे हैं, उनका बंगाल में कोई राजनीतिक आधार नहीं है.

ओडिशा

ओडिशा में बंद का व्यापक असर दिख रहा है. राज्य के कई हिस्सों में ट्रेन और बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं. ट्रेड यूनियन कर्मियों ने 24 घंटे की हड़ताल के समर्थन में रेल पटरियों और सड़कों को जाम किया. वाम दलों और कांग्रेस के समर्थक भी बंद की हिमायत में सड़कों पर उतरे. राज्य के अधिकतर हिस्सों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं. ओडिशा के कई जिलों में शैक्षणिक संस्थान भी बंद हैं. बैंकिंग सेवाओं पर भी बंद का काफी असर है. हड़ताल के कारण किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए राज्य की राजधानी भुवनेश्वर समेत कई जगहों पर सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं.

असम

असम में भी बंद से आम जनजीवन प्रभावित है. सड़कों से वाहन नदारद हैं. दुकानें और बाजार बंद हैं, लेकिन दवा की दुकानें खुली हैं. शैक्षणिक संस्थान खासकर स्कूल बंद हैं. अधिकतर निजी कार्यालय भी बंद हैं, लेकिन राज्य सरकार के कार्यालय खुले हैं. हड़ताल के दौरान सरकारी दफ्तरों में कामकाज सामान्य रूप से चले, इसे सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को दिशा-निर्देश जारी किए था और वेतन कटौती व अन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी. समूचे राज्य में अधिकतर बैंक बंद हैं.

कर्नाटक

कर्नाटक में बंद का कई खास असर नहीं है. बस और ट्रेन सेवाएं रोज की तरह चल रही हैं. स्कूल, कॉलेज और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी खुले हैं. कृषि उपज विपणन समिति के यार्ड में इसका कुछ असर देखने को मिला जहां कर्मचारी काम करने नहीं पहुंचे. मंगलुरु में केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की अंतरराज्यीय सेवाएं निलंबित हैं.

पंजाब और हरियाणा

पंजाब और हरियाणा में बंद का ठीक-ठाक असर देखा जा रहा है. सार्वजनिक बैंकों, परिवहन विभाग, डाक घर और किसानों के कई संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया. इसके चलते बैंकिंग से लेकर परिवहन सेवाओं पर असर पड़ा है. ट्रेड यूनियन कर्मियों ने पंजाब में लुधियाना, जालंधर और बठिंडा समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. जालंधर में ट्रेड यूनियन कर्मियों द्वारा कारखाने में काम करने वाले कुछ लोगों को काम पर जाने से रोकने की खबर है. हरियाणा में, सार्वजनिक परिवहन सेवा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. हरियाणा परिवहन के कर्मियों के सिर्फ एक धड़े ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की थी.

इसके अलावा केरल, तमिनलाडु और महाराष्ट्र में भी बंद ने बैंकिंग और परिवहन सेवाओं पर असर डाला है.

मजदूर संघ क्या कह रहे हैं?

मजदूर संघों का आरोप है कि सरकार नए इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल के जरिये श्रम कानून में बदलाव करके उनके अधिकारों का हनन कर रही है. इसके विभिन्न प्रावधानों में औद्योगिक संस्थानों में हड़ताल करने को कठिन बनाया गया है जबकि बर्खास्तगी को आसान. मजदूर संघों के मुताबिक लेबर कोड के नाम पर मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है. उनकी मांग है कि बेरोजगारी खत्म हो, न्यूनतम मजदूरी तय की जाए और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो. वे सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपये प्रति महीना करने की मांग कर रहे हैं. मजदूर संघ रेलवे, पेट्रोलियम, रक्षा और बीमा क्षेत्र के निजीकरण का भी विरोध कर रहे हैं.