बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले में एक नया मोड़ आ गया है. पीटीआई के मुताबिक सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें उसने कहा है कि इस आश्रय गृह में बच्चों की हत्या के कोई सबूत नहीं मिले. उसका यह भी कहना था कि जिन 35 लड़कियों को मरा मान लिया गया था वे बाद में जिंदा मिलीं.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण का मामला मई 2018 में तब सामने आया था जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने ऑडिट के दौरान यहां की बच्चियों से बातचीत कर एक रिपोर्ट तैयार की थी. इसके बाद पुलिस जांच में कई लड़कियों के गायब होने का खुलासा भी हुआ. विवाद बढ़ा तो राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.

बीते मार्च में सीबीआई ने एनजीओ के संचालक और मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत 21 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. उसने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में कई लड़कियों की हत्या की गई. एजेंसी का यह भी कहना था कि परिसर में की गई खुदाई में उसे कंकाल भी मिले हैं. एजेंसी के मुताबिक बृजेश ठाकुर ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया. इसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी 21 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करते हुए मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. आज जांच एजेंसी ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि दो कंकाल बरामद हुए थे लेकिन बाद में फॉरेंसिक जांच में पता चला कि ये कंकाल एक महिला और एक पुरुष के थे.