महाराष्ट्र के गृहमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने बुधवार को भीमा-कोरेगांव मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अलग विचार रखने के लिए लोगों पर ‘अर्बन नक्सल’ का ठप्पा लगाना गलत है.

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा, ‘मैंने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले की (मौजूदा) स्थिति, इसकी जांच और परिणाम पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.’ राकांपा के वरिष्ठ नेता ने भाजपा का नाम लिए बगैर कहा, ‘जो कोई उनके विचारों से असहमत है उन्हें अर्बन नक्सल करार दे रहे हैं और यह गलत है. पिछली सरकार ने इस बारे में एक उदाहरण स्थापित किया था.’ मुंबई में हाल ही में एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला के ‘फ्री कश्मीर’ पोस्टर लिए होने के बारे में पूछे जाने पर देशमुख ने कहा कि पुलिस उसकी पृष्ठभूमि खंगाल रही है.

पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 के एलगार परिषद और इसके अगले दिन पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव में हुई जातीय झड़पों के बीच कथित संबंधों की जांच के दौरान ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था. पुणे नगर पुलिस ने मामले में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने हिंसा भड़काने को लेकर हिंदुत्व नेता मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था. एकबोटे को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई थी, जबकि भिडे को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने उस समय भी मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की थी.