विश्व बैंक ने 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार के पांच प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. विश्व बैंक ने इससे पहले के अनुमानों में वित्तीय वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृ्द्धि छह फीसद रहने की संभावना जताई थी. लेकिन अपने ताजा आकलन में उसने भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार छह से घटा पांच फीसद कर दी है.
विश्व बैंक की बुधवार को जारी ‘वैश्विक आर्थिक संभावनाएं’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के ऋण वितरण में नरमी जारी रहने का अनुमान है. इसके चलते भारत की वृद्धि दर 2019-20 में पांच प्रतिशत रह सकती है.’ विश्व बैंक के अनुसार, लोगों के उपभोग तथा निवेश में नरमी ने सरकारी खर्च के प्रभाव को नगण्य बना दिया है. आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शेष समय में भी आर्थिक गतिविधियों के कमजोर बने रहने की आशंका है. हालांकि, विश्व बैंक ने कहा है कि अगले साल 2020- 21 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच सकती है. विश्व बैंक ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के 2020 में 2.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान व्यक्त किया है. जबकि 2019-20 में पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत तथा बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत से कुछ ऊपर रह सकती है.
इससे पहले मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों में भी 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के पांच प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है. सरकार ने विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन को इसका कारण माना है. अगर 2019-20 के वित्तीय वर्ष में भारत की वृद्धि दर पांच फीसद रहती है तो यह 11 साल की सबसे धीमी वृद्धि दर होगी.
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