नए नागरिकता कानून पर देश भर में चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. उसने कहा है कि देश मुश्किल दौर से गुजर रहा है और ऐसे में पहली कोशिश शांति के प्रयासों की होनी चाहिए. ज्यादातर अखबारों ने इस खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 13 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक का बहिष्कार कर दिया है. इसमें वाम दल भी हिस्सा ले रहे हैं. ममता बनर्जी ने इन दोनों पार्टियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

पीडीपी फिर टूट के कगार पर

पीडीपी एक बार फिर बड़ी टूट के कगार पर पहुंच गई है. आठ पूर्व विधायकों के अनच्छेद 370 के खात्मे का समर्थन करने और 15 देशों से आए राजनयिकों से मिलने के बाद अब पार्टी के संरक्षक और पूर्व सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने सीधा महबूबा मुफ्ती को निशाने पर ले लिया है. उन्होंने कहा है कि भड़काऊ बयानों के कारण ही जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा चला गया. मुजफ्फर बेग ने खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और एनएसए अजीत डोभाल की तारीफ भी की. पार्टी में हुई बगावत को देखते हुए पीडीपी ने नौ पूर्व विधायकों और एमएलसी को तो पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, लेकिन बेग पर अभी तक चुप्पी है. मुजफ्फर बेग पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से हैं. वे पहले भी अनदेखी का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ने का एलान कर चुके हैं. हालांकि बाद में महबूबा मुफ्ती ने उन्हें मना लिया था और पार्टी का संरक्षक बना दिया था.

अमेरिकी संसद में युद्ध को रोकने के लिए मतदान

जनरल कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिका और ईरान में तनातनी जारी है. इस हत्या और जवाबी कार्रवाई के रूप में इराक में ईरान के हवाई हमले के बाद दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बने हुए हैं. हिंदुस्तान के मुताबिक अमेरिकी संसद के निचले सदन से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार सीमित करने का युद्ध शक्ति प्रस्ताव पारित हुआ. इस प्रस्ताव का मतलब है कि अब डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध का ऐलान करने से पहले संसद की मंजूरी की जरूरत होगी. हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को ऊपरी सदन यानी सीनेट में पास होना बाकी है.

बलात्कार के 27.2 फीसदी मामलों में ही सजा : एनसीआरबी

2018 में हुए अपराधों पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट आ गई है. अमर उजाला के मुताबिक इसमें कहा गया है कि इस साल बलात्कार के 27.2 के प्रतिशत मामलों में ही बात सजा तक पहुंच सकी. साल 2018 में दुष्कर्म के 1.56 लाख मामलों की सुनवाई देश की निचली अदालतों में होनी थी, लेकिन महज 11.31 प्रतिशत की ही सुनवाई हो सकी. इतना ही नहीं जिन मामलों में सुनवाई हुई उनमें भी महज 27.2 प्रतिशत में ही सजा हो पाई. यानी 1.38 लाख मामले लंबित रह गए.