कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को लेकर कटाक्ष किया है. पीटीआई के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी बजट के संदर्भ में किसानों, युवाओं, महिलाओं और छोटे कारोबारियों की आवाज नहीं सुनना चाहते. उन्होंने बैठक की तस्वीर शेयर करते हए ट्वीट किया, ‘बजट को लेकर मोदी की सबसे गहन बैठक उनके पूंजीपति मित्रों और सबसे अमीर लोगों के लिए आरक्षित होती है.’ राहुल गांधी ने आगे लिखा, ‘उनकी हमारे किसानों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं, सरकारी और पीएसयू कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों या मध्यम वर्ग के करदाताओं की आवाज सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अर्थशास्त्रियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ नीति आयोग में एक बैठक की थी. समझा जाता है कि इस बैठक में आर्थिक वृद्धि को गति देने के उपायों और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा हुई. हालांकि इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अनुपस्थिति ने भी सुर्खियां बटोरीं.

मोदी सरकार सरकार 2020-21 के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करने में जुटी है. माना जा रहा है कि इस बैठक का एक मकसद यह भी था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के लिए आम लोगों से भी सुझाव मांगे हैं. इससे पहले उन्होंने सोमवार को देश के शीर्ष उद्योगपतियों के साथ अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अपना दूसरा आम बजट पेश करेंगी जिसमें देश की आर्थिक वृद्धि को फिर से पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती होगी.

हाल में सरकार ने कॉरपोरेट कर में कटौती जैसे कई अहम ऐलान किए हैं, लेकिन इनका अर्थव्यवस्था की मंदी पर कोई खास असर होता नहीं दिख रहा. इसे लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है. हालांकि कुछ समय पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि आर्थिक सुधारों का असर अब दिखने लगा है. इसके बावजूद कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं. इसके अलावा आर्थिक जानकार भी उसकी आलोचना कर रहे हैं. कुछ समय पहले मोदी सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है.