अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि वह इराक से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाएगा. शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टेगस ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ‘इस समय अगर किसी प्रतिनिधिमंडल को इराक भेजा जाता है तो उसका मकसद सैनिकों की वापसी पर चर्चा करने के बजाय सामरिक साझेदारी को मजबूत बनाना होगा. हमारी कोशिश है कि मध्यपूर्व में पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बल तैनात रहें.’

इससे पहले इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया था कि प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल-मेहदी ने गुरूवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ बातचीत में अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर चर्चा की. अब्दुल-मेहदी ने पोम्पियो से कहा कि वह अपने सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिये एक प्रतिनिधिमंडल को इराक भेजें. इस समय इराक में अमेरिका के 5,200 सैनिक तैनात हैं.

इराक सरकार के मुताबिक उसकी तरफ से अमेरिका से यह भी कहा गया कि इराक में अमेरिका द्वारा किए गए हालिया ड्रोन हमले दोनों देशों के बीच सुरक्षा समझौतों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता.

बीती तीन जनवरी को इराक में बगदाद के हवाई अड्डे पर अमेरिकी ड्रोन हमलों में ईरानी शीर्ष जनरल कासिम सुलेमानी और इराकी मिलिशिया के वरिष्ठ कमांडर अबू मेहदी अल-मुहांदिस की मौत हो गई थी. इसके बाद इराकी संसद ने अमेरिकी सैनिकों को वापस भेजने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था.