प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ब्रिटिश शासन और आजादी के बाद देश के इतिहास के बारे में जिन इतिहासकारों ने लिखा, उन्होंने उसके कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की. उनके मुताबिक ऐसा लगता है कि तब भारत के लोगों का अस्तित्व ही नहीं था.

शनिवार शाम कोलकाता में 1833 में स्थापित एवं फिर से विकसित की गई करेंसी बिल्डिंग के उद्घाटन कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘कुछ लोग बाहर से आये, उन्होंने सिंहासन की खातिर अपने ही रिश्तेदारों, भाइयों को मार डाला... यह हमारा इतिहास नहीं है. यह स्वयं गुरूदेव (रवींद्रनाथ टैगोर) ने कहा था. उन्होंने कहा था कि इस इतिहास में इसका उल्लेख नहीं है कि देश के लोग क्या कर रहे थे. क्या उनका कोई अस्तित्व नहीं था. यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि ब्रिटिश शासन के दौरान और आजादी के बाद भी जो इतिहास लिखा गया उनमें कई महत्वपूर्ण अध्यायों की अनदेखी की गयी.

रवींद्रनाथ टैगोर का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, ‘भारत का इतिहास वो नहीं है जो हम याद करते हैं और परीक्षाओं में लिखते हैं. हमने देखा है कि बेटे ने पिता की हत्या कर दी और भाई आपस में लड़ रहे हैं. यह भारत का इतिहास नहीं है.’

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) पर विवाद के बीच प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हिंसा के इस समय में, राष्ट्र की अंतररात्मा को जगाना जरूरी है. इससे ही हमारी संस्कृति, इतिहास और दर्शन का उदय हुआ है.’

प्रधानमंत्री ने घोषणा कि खुदीराम बोस, रास बिहारी बोस, विनय बादल और दिनेश, ऋषि अरविंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे बंगाल के देशभक्तों के लिए विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में एक गैलरी आरक्षित की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि लेखक शरत चंद्र चटर्जी, समाज सुधारक केशब सेन और ईश्वर चंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे लोगों ने दुनिया को भारत की ताकत दिखाई थी.

बंगाल से पुनर्जागरण काल की एक अन्य शख्सियत राजा राममोहन राय पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश को उनके सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता है.