संशोधित नागरिकता कानून, 2019 (सीएए) के मुद्दे पर देश के कई विश्वविद्यालयों में हिंसा से पैदा हुई स्थिति पर चर्चा के लिए आज विपक्षी दलों की एक बैठक हो रही है. यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुलाई है. उधर, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के बाद बसपा मुखिया मायावती और आम आदमी पार्टी ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है.

ममता बनर्जी ने यह फैसला बीते बुधवार को ट्रेड यूनियनों के बंद के दौरान राज्य में वामपंथी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा के विरोध में लिया है. 24 घंटे के इस राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा और आगजनी की कई घटनाएं हुई थीं. प्रदर्शनकारियों ने रेल और सड़क यातायात बाधित करने का भी प्रयास किया. इससे आम जनजीवन पर असर पड़ा. ममता बनर्जी ने कहा कि वामपंथियों और कांग्रेस के ‘दोहरे मानदंड’ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि वे हिंसा का समर्थन नहीं करतीं और अगर जरूरत पड़ी तो वे अकेले लड़ेंगी.

उधर, मायावती ने आज ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘जैसाकि विदित है कि राजस्थान में कांग्रेसी सरकार को बीएसपी का बाहर से समर्थन दिये जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार वहां बीएसपी के विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो यह पूर्णतयाः विश्वासघाती है. ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में आज विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बीएसपी का शामिल होना, यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा. इसलिए बीएसपी इनकी इस बैठक में शामिल नहीं होगी.’

मायावती पिछले कुछ समय से कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार हमलावर हैं. हाल में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत के मामले में निशाना साधा था. मायावती का कहना था कि अगर कांग्रेस की महिला महासचिव कोटा जाकर उन मांओं से नहीं मिलती हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है तो उत्तर प्रदेश में पुलिस की हिंसा से पीड़ित परिवारों से उनकी मुलाकात को राजनीतिक ड्रामा माना जाएगा.

उधर, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने बताया कि पार्टी को बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए इसमें शामिल होने को कोई मतलब नहीं है. सूत्रों ने हालांकि दावा किया कि दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आप इस बैठक में शामिल नहीं हो रही.