नए नागरिकता कानून पर कल विपक्षी दलों की बैठक हुई. यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुलाई थी. हालांकि शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस और बसपा जैसी बड़ी पार्टियों ने इससे दूरी बनाकर रखी. यह खबर आज लगभग सभी अखबारों के पहले पन्ने पर है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएयू में हुई हिंसा के सिलसिले में विश्वविद्यालय की छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष से पूछताछ की. पांच जनवरी को हुई इस घटना के संबंध में दो और छात्रों से भी पूछताछ की गई. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है.

आईसीआइसीआई बैंक ने चंदा कोचर से वसूली के लिए हाई कोर्ट का रुख किया

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. दैनिक जागरण के मुताबिक बैंक ने एमडी और सीईओ के पद से उनकी बर्खास्तगी को प्रभावी करने और वेतन-भत्ताें के रूप में उन्हें दी गई रकम की वसूली के लिए बांबे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उसने क्लॉबैक क्लाज के तहत अप्रैल 2006 से मार्च 2018 तक उन्हें दिए गए बोनस और इंसेटिव की वसूली के लिए याचिका दाखिल की है. इस प्रावधान के तहत गड़बड़ी पाए जाने पर किसी कर्मचारी से इंसेंटिव आधारित वेतन या बोनस को वापस लिया जा सकता है. चंदा कोचर पर अपने लाभ के लिए बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

जेएनयू के वीसी के खिलाफ कार्रवाई क्यों हो : रमेश पोखरियाल

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा है कि जेएनयू के वाइस चांसलर अच्छा काम कर रहे हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उनका कहना था, ‘उनके ख़िलाफ क्यों कार्रवाई करें?’ जेएनयू कैंपस में पांच जनवरी को हुई मारपीट के बाद जेएनयू का छात्र संघ और शिक्षक संघ, वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी भी यह मांग कर चुके हैं. उधर, रमेश पोखरियाल का कहना है कि यह छात्रों के दो गुटों के झगड़े का मामला है.

आम्रपाली मामला : जेपी मॉर्गन पर गाज

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा सहित अन्य निदेशकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की अनुमति दे दी है. नवभारत टाइम्स के मुताबिक यह पूछताछ मनी लॉन्डरिंग के एक मामले में होनी है. अदालत ने यह भी कहा है कि नियमों का उल्लंघन कर दिवालिया हो चुके आम्रपाली समूह के साथ लेनदेन करने वाले जेपी मॉर्गन की संपत्तियां भी जब्त की जाएं. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने पहली नजर में पाया कि जेपी मॉर्गन ने फेमा कानून का उल्लंघन कर लेन-देन किया है और इस संबंध में एक शिकायत भी दर्ज की गई है.