दिल्ली पुलिस को आज तीस हजारी अदालत से तगड़ी फटकार सुनने को मिली. मामला भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की गिरफ्तारी का है. उन्हें बीते महीने नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के चलते जामा मस्जिद से हिरासत में लिया गया था. उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के वकील से उन पर लगे आरोपों के बारे में पूछा. इस पर उन्होंने कहा कि वे पूछकर बताएंगे. इस पर अदालत ने नाराजगी जताई. अतिरिक्त सेशन जज कामिनी लाउ ने यह भी कहा कि पुलिस ऐसे बर्ताव कर रही है कि जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में हो. उनका आगे कहना था, ‘अगर होती भी तो वहां भी आप जाकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. पाकिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा था.’

अदालत का यह भी कहना था कि विरोध जनता का संवैधानिक अधिकार है और लोग इसीलिए प्रदर्शन कर रहे हैं कि संसद में जो बातें कही जानी चाहिए थीं वे नहीं कही गईं. जब सरकारी वकील ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद धारा 144 लगी होने के बावजूद बिना इजाजत लिए प्रदर्शन करने गए तो अदालत ने उनके पूछा, ‘कैसी इजाजत? सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि बार-बार धारा 144 लगाना शक्तियों का दुरुपयोग है.’