कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा कल एक सार्वजनिक आयोजन में आपा खो बैठे. यह तब हुआ जब दवनगिरी में एक रैली के दौरान मंच पर बैठे लिंगायत समुदाय के एक संत ने अपने संबोधन के दौरान उनसे भाजपा के एक विधायक को कैबिनेट में शामिल करने के लिए कहा. समुदाय के प्रभावशाली संत वाचनानंदा स्वामी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री जी, आप मेरे बगल में बैठे हैं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि मुरुगेश निरानी की उपेक्षा मत करें. अगर आपने उनका ख्याल नहीं रखा तो आप पूरे समुदाय का समर्थन गंवा सकते हैं.’

इतना सुनना था कि बीएस येदियुरप्पा का चेहरा तमतमा गया. वे तुरंत खड़े हुए और कहा, ‘मैं यहां ये सब सुनने नहीं आया हूं...मैं आपकी मांग के हिसाब से काम नहीं करूंगा. मैं जा रहा हूं.’ इसके बाद उन्हें वाचनानंदा स्वामी के पांव छुए और जाने लगे. इसके बाद दोनों में कुछ बातचीत हुई और बीेएस येदियुरप्पा अपनी सीट पर लौटे. बाद में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उन 17 बागी विधायकों का ख्याल रखना है जो कांग्रेस और जेडीएस छोड़कर भाजपा में आए हैं.

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बीएस येदियुरप्पा का कहना था, ‘मैं स्वामी से प्रार्थना करता हूं. मेरी स्थिति समझें. इन 17 विधायकों ने विधायिकी और मंत्री पद छोड़े हैं. उनके बिना येदियुरप्पा मुख्यमंत्री नहीं बन सकता था.’ उनका आगे कहना था, ‘उनके बलिदान और आप सबके आशीर्वाद से मैं मुख्यमंत्री बना हूं. संतों के सुझावों का स्वागत है. मैं खुद उनके पास जाऊंगा और व्यक्तिगत रूप से इन पर चर्चा करूंगा. अगर आपको इसकी जरूरत नहीं है तो मैं कल ही इस्तीफा देने को तैयार हूं.’

मुरुगेश निरानी नाम के जिस विधायक को लेकर यह बवाल हुआ उन्हें कर्नाटक के लिंगायत समुदाय के नेताओं में बीएस येदियुरप्पा का प्रतिद्वंदी माना जाता है. राज्य में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में इस समुदाय की अहम भूमिका रही है. 225 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं. इसमें से बीएस येदियुरप्पा ने 16 सीटें कांग्रेस और जेडीएस के उन विधायकों के लिए बचा रखी हैं जिनकी बगावत के चलते वे सत्ता में लौटे हैं.