निर्भया मामले के चारों दोषियों की फांसी पर पेंच फंस गया है. दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि एक दोषी ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी है जिसके चलते 22 जनवरी को चारों दोषियों को फांसी की सजा के आदेश पर अमल नहीं किया जा सकता. मुकेश सिंह नाम के इस दोषी ने यह याचिका कल भेजी है. इसमें उसने अपने डेथ वारंट को ‘प्रीमैच्योर’ बताया है. नियम है कि ऐसी याचिका खारिज होने के बाद भी फांसी के लिए दोषी को 14 दिन का वक्त देना होता है. यानी अब तिहाड़ जेल अधिकारियों को याचिका खारिज होने तक इंतजार करना होगा.

दिल्ली की एक अदालत इस मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर चुकी है. इसके मुताबिक उन्हें 22 जनवरी की सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जानी है. इस फांसी की रिहर्सल भी की जा चुकी है. उधर, हाई कोर्ट ने डेथ वारंट को रद्द करने से इंकार कर दिया है. उसका कहना है कि दोषी ये वारंट जारी करने वाली अदालत में जाने और उसे दया याचिका के बारे में सूचित करने के लिए आजाद हैं.

16 दिसंबर 2012 की रात दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में छह लोगों ने 23 साल की निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया था. बर्बरता के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया गया. कई दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद निर्भया ने 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था. इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे.