निर्भया मामले के दोषियों की सजा पर पेंच फंसा, दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट से कहा – दया याचिका के चलते फांसी 22 जनवरी को नहीं हो सकती

निर्भया मामले के चारों दोषियों की फांसी पर पेंच फंसता दिख रहा है. दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को सूचित किया है कि एक दोषी ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी है. उसके मुताबिक इसके चलते 22 जनवरी को चारों दोषियों को फांसी की सजा के आदेश पर अमल नहीं किया जा सकता. मुकेश सिंह नाम के इस दोषी ने ये याचिका कल भेजी है. नियमों के मुताबिक ये याचिका खारिज होने के बाद फांसी के लिए दोषी को 14 दिन का वक्त देना होता है. दिल्ली की एक अदालत इस मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर चुकी है. उधर, हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट को रद्द करने से इंकार कर दिया है. उसका कहना है कि दोषी ये वारंट जारी करने वाली अदालत में जाने और उसे दया याचिका के बारे में सूचित करने के लिए आजाद हैं.

2012 में दिल्ली में एक बस में 23 साल की निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था. बर्बरता के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया गया. कई दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद निर्भया ने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था. इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे.

सेना प्रमुख का बड़ा बयान, कहा – अनुच्छेद 370 पर केंद्र के फैसले से आतंकवाद पर असर पड़ा है

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने को ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि इसका पाकिस्तान द्वारा छेड़े गये छद्म युद्ध यानी कश्मीर में आतंकवाद पर असर पड़ा है. उनका ये भी कहना था कि अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिलेगी. सेना प्रमुख ने ये बातें 72वें सेना दिवस के मौके पर कहीं. जनरल नरवणे ने ये भी कहा कि सशस्त्र बल आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करते. इसके साथ ही उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि उनकी अलग-अलग जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा.

एनआईए कानून के खिलाफ छत्तीसगढ़ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इसे असंवैधानिक बताया

छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए एनआईए कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है. वो इस कानून को चुनौती देने वाली पहली राज्य सरकार है. अपनी याचिका में उसने कहा है कि 2008 में बना एनआईए कानून संविधान के अनुरूप नहीं है. छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक ये कानून संसद के विधायी अधिकार क्षेत्र से बाहर है. उसने ये मामला संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर किया है. इसमें प्रावधान है कि केंद्र के साथ विवाद होने पर राज्य सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है. इससे एक दिन पहले केरल ने भी इसी अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी. उसने नागरिकता संशोधन कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है.

जम्मू-कश्मीर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा आंशिक रूप से बहाल, सोशल मीडिया पर रोक जारी

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य के कुछ हिस्सों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा बहाल कर दी है. फिलहाल इसे होटलों, यात्रा प्रतिष्ठानों और अस्पतालों में शुरू किया गया है. हालांकि सोशल मीडिया पर रोक जारी रहेगी. जम्मू क्षेत्र के कुछ इलाकों में ई-बैंकिंग जैसी सेवाओं के लिए पोस्ट-पेड मोबाइलों पर 2 जी मोबाइल कनेक्टिविटी की मंजूरी भी दी गई है. बीते साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद वहां इंटरनेट सहित कई सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई थी. धीरे-धीरे इन पाबंदियों को हटाया जा रहा है. हाल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेट सेवा अभियक्ति की आजादी के बुनियादी अधिकार के तहत आती है. शीर्ष अदालत का कहना था कि इस सेवा को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता.

इराक में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले एक सैन्य अड्डे पर रॉकेट हमला

इराक में फिर से अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया है. ये हमला बगदाद से 85 किलोमीटर दूर स्थित अल ताजी बेस पर रॉकेट के जरिये हुआ. यहां काफी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. अभी किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. बीते बुधवार को भी बगदाद के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र ग्रीन जोन में दो रॉकेट आकर गिरे थे. इस इलाके में अमेरिकी मिशन समेत अन्य देशों के दूतावास स्थित हैं. इस हमले के लगभग 24 घंटे पहले ईरान ने दो इराकी सैन्य अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए थे. इन अड्डों पर अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए थे. ये हमले ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए किए गए थे. जनरल सुलेमानी की मौत एक अमेरिकी हमले में हुई थी.