तिहाड़ जेल प्रशासन ने निर्भया मामले के चार दोषियों- मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को फांसी देने के लिए नई तारीख मांगी है. दिल्ली की एक अदालत ने इन चारों का डेथ वॉरेंट इसी 7 जनवरी को जारी किया था. इसके मुताबिक इन चारों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी दिया जाना तय था. लेकिन इनमें से मुकेश सिंह ने बीते मंगलवार को अपनी दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेज दी. इसमें उसने अपने डेथ वॉरेंट को ‘प्रीमैच्योर’ बताया है.

हालांकि, इस बात की पूरी संभावना बताई जा रही है कि राष्ट्रपति इस याचिका को खारिज कर देंगे. लेकिन नियमानुसार ऐसी याचिका के खारिज होने के बाद भी फांसी के लिए दोषी को 14 दिन का वक्त देना होता है. अब अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन से शुक्रवार तक इस मामले से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इसके बाद अदालत दोषियों की सजा के लिए नया डेथ वॉरेंट तैयार करेगी.

यह मामला सामने आते ही इस पर राजनीति शुरु हो गई है. दोषियों की फांसी टलने के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आप सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की दया याचिका को 2017 में ही खारिज कर दिया था. इसके बाद दिल्ली सरकार द्वारा इन लोगों को अग्रिम याचिका के लिए नोटिस भेजना था. लेकिन इसे बीते अक्टूबर तक नहीं भेजा गया. ढाई साल की यह देरी बताती है कि दिल्ली सरकार को गुनहगारों से सहानुभूति है.’

दिल्ली सरकार ने खुद पर लगे इन आरोपों को नकारते हुए भाजपा पर पलटवार किया है. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का इस बारे में कहा है कि उनकी सरकार ने मुकेश की दया याचिका को बिजली की तेजी से उपराज्यपाल अनिल बैजल के पास भेज दी थी, जहां से यह केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचा दी गई. आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस बारे में कहा, ‘सजा में जो भी देर हुई है उसके लिए भाजपा जिम्‍मेदार है, क्‍योंकि दिल्ली की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है. हमने इस मामले में जरा भी देरी नहीं की है. इसलिए लोगों को गुमराह करने की बजाय केंद्रीय मंत्री को ऐसे संवदेनशील मामले की अनदेखी करने के लिए माफी मांगनी चाहिए.’

इस पूरे घटनाक्रम पर निर्भया की मां ने निराशा जाहिर करते हुए आशंका जताई कि दोषियों की सजा फिर से लंबे समय के लिए टल जाएगी. उन्होंने कहा, ‘मैं सालों से अदालतों के चक्कर काट रही हूं. लेकिन अब हमें न्याय चाहिए. अगर उनके (दोषियों) अधिकार हैं तो हमारे पास भी अपनी बेटी के लिए न्याय पाने का अधिकार है जिसे सात साल पहले मार दिया गया था.’

16 दिसंबर 2012 की रात दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में छह लोगों ने 23 साल की निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया था. बर्बरता के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया गया. कई दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद निर्भया ने 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था. इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे.