भारतीय नौसेना तंगहाली से जूझ रही है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बजट में कटौती की वजह से उसे रक्षा सौदों में कटौती करनी पड़ रही है. फंड की कमी के चलते हथियार सौदों पर असर पड़ा है. बताया जा रहा है कि पैसों की कमी की वजह से नौसेना कुछ हथियारों की संख्या घटा रही है और कुछ परियोजनाएं भी बंद कर रही है.

भारतीय नौसेना को मौजूदा बजट में 64,307 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि के मुकाबले 41,259 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे. नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि यह रकम उन सौदों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है जिन पर पहले से सहमति बनी हुई है. उनके मुताबिक ऐसे में नए सौदों का सवाल ही नहीं उठता.

2018 में संसद की एक प्राक्कलन समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में रक्षा बजट में सशस्त्र बलों को अपर्याप्त कोष आवंटन पर सरकार की आलोचना की थी. उसका कहना था कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में देश इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर सकता, खासकर तब जब दो मोर्चों पर युद्ध की संभावना हो. भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा में भी पेश की थी. उसने कहा था कि रक्षा बजट में तीनों सेनाओं को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.56 प्रतिशत आवंटन किया गया है. उसका कहना था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह सबसे कम है.

इससे पहले रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना को पर्याप्त कोष न दिए जाने की आलोचना की थी. उसका कहना था कि खर्च में इस तरह की कमी का सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर विपरीत असर पड़ता है. उसने इसे देश की सुरक्षा से समझौते जैसा बताया है. सेना ने इस स्थायी समिति को बताया था कि वह गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है और उसे हथियारों की आपात खरीद के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.